शनिवार, 10 सितंबर 2011

मेरे कृष्णा ! तुम्हारी कठोरता सुख मेरा ही ,

मेरे कृष्णा !
तुम बिन कोई नहीं मेरा इस संसार
तुम जानो मेरे मन की बतियाँ,
और दो खामोश सीख अपार ,
तुम्हारी कठोरता में भी छिपा हैं
मेरा ही अपार सुख मेरा ही ,
जानो तुम ही सब कुछ
इसीलिए में मानु अपने को धन्य
और करू जन्मो तुम्हारी चरण सेवा अपार
धन्य हूँ में जनम जो पाया तुम्हारा स्नेह अपार
जो तुम दोहर क्षण सब स्वीकार
पर जो तुमने तय किया वो ही मेरा भाग्य
तो फिर किस कठिन राह से इनकार
जो तुम संग बसे हो इस आत्मा के
फिर क्या डर इस तुच्छ संसार
सदा दूर से ही ,अपने बैकुंठ से ही बरसाते रहो
स्नेह आशीष अपार
में बदली थी बदली हूँ
मेरे कृष्णा !
में तो चल पड़ी हूँ
तेरी ही राह
मेरा मोक्ष तेरी चरण सेवा
ये ही जीवन लक्ष्य मेरा
श्री चरणों में
अनुभूति






रविवार, 4 सितंबर 2011

"प्रीत "

किसी का स्नेह जीवन में कितना कुछ बदल देता हैं ,सामने घटित  देखतीहूँ तो अपने अंतस को या कहूँ अन्दर के इंसान को रोक नहीं पाती ,स्नेह का आलोक कविता बन फुट पड़ता हैं |


वो जीने लगा हैं अब फिर ,
बुझा -बुझा सा एक दीप,
आज f उठा हैं हां ,
अब वो जीने लगा हैं |

लौट आई हैं इस
में "प्रीत " हँसती ,
मुस्कुराहटों की तरह
गुनगुनाती जिन्दगी की ,
अब
वो जीने लगा हैं |

सालो बाद आज उतार फेका
हैं
e खामोशी का चोगा
हां
,दिल के सारे दरवाजे खोल
हैं "प्रीत "तुम्हारा
स्वागत
हां
,अब वो जीने लगा हैं |

तुमने लौटा दी हैं

एक लाश में
जिन्दगी
 
खामोश लबो पे मुस्कराहट हां ,
 अब वो जीने लगा हैं |
  हां "प्रीत "अब वो जीने लगा हैं | 
अनुभूति

शनिवार, 3 सितंबर 2011

जिन्दगी की अदा



मेरे खुदा !
वो कहता हैं मुझसे अभी तेरे और भी इम्तिहान बाकी हैं
तू ज़रा ठहर जा ,
जख्मों के लिए अभी तेरे दिल में और भी जगह बाकी हैं |


वो रोज अहसास बन कर उतरता हैं मुझमे ,
कुरआन की आयतों की तरह
पर उसे पता भी नहीं
वो उतरता हैं मुझमे पल -पल मेरे मरने के बाद
जीने के आस लिए जिन्दगी की तरह |


वो चाँद का घुंघट ,खनकती पायल
आज भी तडपती हैं ,
जिन्दगी की अदा लिए
असीम आत्म आनंद अनुभूतियों की तरह |
अनुभूति

शुक्रवार, 2 सितंबर 2011

आज त्याग सारा संसार में हुयी तेरी



मेरे कृष्णा !
देखि तेरी दुनिया
तुझसा साँचाकोई नहीं
इतना जानू
आज त्याग सारा संसार में हुयी तेरी
मेरे श्याम !
मेरा सिंगार भी तुम
और अखियन से गिरती अश्रु धार भी
तुम ही हो
मेरा जीवन तुझको अर्पण
मेरे श्याम !
श्री चरणों में अनुभूति

मंगलवार, 30 अगस्त 2011

MEERA (1979) - Mere to Giridhar Gopal - Hema Malini - Eng/Subs

मेरे तो गिरिधर गोपाल

जीवन का अद्भुत रस आलोकिक अहसास मेरे कृष्णा !

की प्रीत ,ऊनकी चाकरी ये ही हैं जीवन

अनुभूति

MEERA (1979) - Mere to Giridhar Gopal - Hema Malini - Eng/Subs

मेरे तो गिरिधर गोपाल

जीवन का अद्भुत रस आलोकिक अहसास मेरे कृष्णा !

की प्रीत ,ऊनकी चाकरी ये ही हैं जीवन

अनुभूति

MEERA (1979) - Mere to Giridhar Gopal - Hema Malini - Eng/Subs

मेरे तो गिरिधर गोपाल

जीवन का अद्भुत रस आलोकिक अहसास मेरे कृष्णा !

की प्रीत ,ऊनकी चाकरी ये ही हैं जीवन

अनुभूति

मेरे तो गिरिधर गोपाल


मेरे तो गिरिधर गोपाल 
 जीवन का अद्भुत रस आलोकिक अहसास मेरे  कृष्णा !
 की प्रीत ,ऊनकी चाकरी ये ही हैं जीवन
अनुभूति

Meera (1979) - Shayam mane chakar rakhoj - Hema Malini - Eng/Subs

तुम्हरा ही अंश हूँ कोस्तुभ धारी !

मेरे कृष्णा !
तुम से ही मेरा जीवन , 
  बिन कुछ नहीं तन,मन शब्द ,प्राण 
   तुम ही तो जानो सब कुछ मेरे अंतस के स्वामी 
   विधि का हर लेख तुमने ही पडा हैं लिखा हैं मेरे लिए 
    दी जो तुमने मुझे अपना ली हँसते -हँसते ,
  अच्छा ,बुरा प्रेम ,घृणा सब बन्धनों से परे मुक्त हुयी हूँ हां तुम्हरा ही अंश हूँ

   अक्स तुम्हारा ही झलकता हैं मुझमे कोस्तुभ धारी !
    तेरी ही रूह ,
तेरा ही अक्स ,
तुझमे मिलता जा रहा प्रति क्षण मेरे राम !

      न दुःख ,न कोई शोक, न कोई ग्लानी ,अब मन में लाओं 
  मेरे कृष्णा!
     नियति मेरी ये ही ,बस हँस के श्री चरणों में
  स्वीकारो मेरे प्राण !
   श्री चरणों में अनुभूति

सोमवार, 29 अगस्त 2011

मेरी आत्मा की विदीर्ण पुकार

मेरे कृष्णा ! 
मेने देखा इतना साकार रूप तेरा 
पर फिर भी आत्मा करे न विशवास 
की ये तुम कह जाओं मुझे ,

        मेरी आत्मा की विदीर्ण पुकार
 तुम्हे अंतस से कर रही पुकार, 
तुम चाहों पर कुछ न मेरे लिए कर,
     पाओं कम से कम इतनी कटुता के भाव
इस रुदय के छलनी अस्तित्व पे मत लगाओ 
,मेरी आत्मा का रोम -रोम
 ऋणी तुम्हरा मेरे श्याम !
 सदा हैं सदा  रहेगा 
  इन चरणों में शीश झुकता ,
  समर्पित जीवन तुम्हे ये कब से पहुचा दो बस अब मोक्ष के धाम

अनुभूति
 

तेरी तलाश

निकला था तेरी तलाश में भटकता ही रहा हुआ जो सामना एक दिन आईने से , पता चला तू तो ,कूचा ए दिल में कब से बस रहा ................