मेरे ठाकुर !
मेरी प्रीत तुझसे ही .ये सांसे तुझसे ही
और कुछ ना जानू मे दुनिया की रीत
जो निभा ना सकू तुझसे अपनी प्रीत
तो मेरी इन सासों मे
मेरे राम नहीं
मेरे राम बसे हैं मुझमे मेरी आत्मा बनकर
श्री चरणों मे अनुभूति
मंगलवार, 15 नवंबर 2011
सोमवार, 14 नवंबर 2011
Kanha Kanha tum sang preet na todungi 18 sept 09
अंतस छूता ये भाव
मेरे कृष्णा !
मेरी सांसो मे बसा हैं सदा मे तुम्हारे ही चरणों मे रहूँ मेरे श्याम !
मैं तो तेरी ही चाकर हूँ श्याम !
मेरे कृष्णा!
कोई भोर नहीं ऐसी जो मैं,
तुझसे लड़ते -लड़ते ,
रोते -रोते न जागू...........
तेरा नाम लेते -लेते दुनिया मुस्काए और मैं रोती ही जाऊं
तुम ही तो कहते थे सब कुछ तुम पे छोड दू ,,,,,
छोड दी थी हर सांस ,हर फेसला ,ये जीवन तुम्हारे चरणों मे ...
और तुम मुझे यूँ रोता छोड गए हो ......
मेरी प्रीत काहे तुम पहचान न सके !
एक ही सच्ची आत्मा ,परम पुरुष का भाव
मेरी आत्मा मे मेने पाया था .........
जो इन चार दीवारों मे रोते -रोते ही मिट जाना
तुम्हरा फेसला तो मुझे हंस के स्वीकार ,
मेने तो माँगा था सिर्फ
एक बार तेरी चरण धूलि का अधिकार ...............
मुझे ताना देते हैं दुनिया के लोग मीरा नाम बुलाते हैं
उन्हें नहीं पता मेरी आत्मा का कितना बड़ा उपहास वो कर जाते हैं
न मैं मीरा की तरह छोड पायी ये चोबारे ................
न ही देख पायी एक झलक प्यारी
जिस दिन मेरा श्याम !
मेरे सामने आएगा
उसकी पलकों के झुकने -गिरने से ,
मेरे मरने जीने का फेसला हो जाएगा...............
उसकी ही हुकूमत का अंदाजा उसे नहीं तो मे क्या करूँ ?
मे बस जी रही हूँ ले कर तेरा नाम मेरे माधव !
इस संसार से मुझे नहीं कोई काम ,
मुझे नहीं करना किसी की चाकरी
मैं तो तेरी ही चाकर हूँ श्याम !
तुम्हारे श्री चरणों मे करती हैं
तुम्हारी अनु अपनी आत्मा के रोम -रोम से
सदा अश्रु पूरित प्रणाम |
रविवार, 13 नवंबर 2011
Bhajans from Meerabai Serial Part 1
मेरी रूह तडपती हैं मेरे मनमोहना !
मेरी आँखों से गिरता ये पानी तुम्हारे चरण पखारता हैं
मेरे माधव !
तुम ही मेरे जीवन का यथार्थ सत्य ,
कुछ पल ही सही अमिट आलोकिक स्नेह अपनत्व देने वाले
तेरे ही चरणों मे करती हैं ये पगली
इन अश्रुओं से इस भोर का आत्मीय नमन ...........................
स्वीकार करो मेरे गिरधर ,,,,,,,,,
ये आहें आत्मा की तुम ही सुन सको सुन लो प्रियतम ...........
तेरे विरह मे यूँ ही तिल -तिल मिट जायेगी ये पगली .......
श्री चरणों मे तुम्हारी अनु .....
शनिवार, 12 नवंबर 2011
बहुत निर्दयो हो तुम
बहुत निर्दयो हो तुम
मेरे कृष्णा !
अपार स्नेह भी देते हो ,
और अपने ही जलने का आभास भी ..........
जो तुम जलो इस स्नेह की राह
तो मे तिल -तिल जल मिट ही जाऊं
तुम मेरा. जीवन मेरी साधना
मेरी शक्ति ...........
तुम ही तो हो मेरे करुणाकर !
जिसने मुझे दीप बनाया
तुमने ही मुझे अपने अंतस से जलना सिखाया .......
इतना जानती हूँ हर राह ,हर सांस संग रही हूँ
हर विपदा के आगे खड़ी हूँ ....
मेरा जीवन तुझे ही अर्पण मेरे करुणाकर .....................
श्री चरणों मे अनुभूति
एक भागवतअंश मेरी आत्मा का
हे मधुसूदन !
मेरी आत्मा मे स्वयं उतर कर
मेरे ही हर सवाल का जवाब देते हो ,,,,,,,,,,
मेरे कृष्णा !
मे भीगी हूँ अपने रोम -रोम से देख
राजा अमरीष पे तुम्हारी कृपा अपरम्पार
.हे जगदिश्वर !
जिसके साथ हो तुम्हरा सुदर्शन
ये संसार क्या उसका कुछ कर पायेगा ......
हे मेरे मोहेश्वर !
मुझे चेन हैं सिर्फ तेरे चरणों मे
मुझे मेरा मार्ग दिखाओ ,
इन झूटे रिश्तों से मुझे भी मुक्ति का मार्ग दिखाओ ........
जीवन भर मेरी आत्मा डूबी रहे तेरे भक्ति सागर मे
इतना ही मुझे वर दो ,,,,,,,
धन्य हू मे तेरे कदमो मे बैठ जो कर सकू मे
ये भागवत आराधन .....
हे कृष्णा !
मुझे ले चल अपने संग
अपने मधु बन ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
ताकि कर सकू मे जीवन भर चेन से
बेखोफ तुम्हरा आत्मीय स्मरण ...........
मेरी आँखों से तुम्हें देख नीर नहीं
परम आन्नद का अमृत बहता हैं
जो मे डूबू तेरे सागर मे तो कभी न मे तर पाऊं .......................
मेरे मुरली मनोहर !
बस अमरीष की तरह ही इस आत्मा पे तेरा आशीष पाऊं .........
श्री चरणों मे तुम्हारी बावरी ,,,,
अनुभूति
शुक्रवार, 11 नवंबर 2011
इन्तजार
तेरे इन्तजार मे ये शब क्या ये जिंदगी यूँ ही कट जायेगी ,
मे मरती ही रहूंगी और तेरे सामने मेरी तक़दीर हँसती जायेगी .......
तुम खुदा हो ,फरिश्ते हो जो भी हो
पर तुम्हारे बिन ये जिंदगी न जी जायेगी
मरना हैं रोज ,हर आह ,
हर अहसास ,तन से हो या आत्मा से
एक दिन तो मिटना ही हैं
फिर मे क्यों न मिट जाऊं तबाही के रास्तो पे ..........
जो न हो सकी मे तेरी तो अपनी होके कहा जी पाऊँगी
जानती हूँ जिस रस्ते पे बड़ी हूँ वो क्या कहा जाता हैं
नहीं मालुम मुझे पर इतना पता हैं वफ़ा का इनाम क्या दिया जाता हैं .........
आप से बेहतर किसी ने मुझे इनाम नहीं बख्शा ,,,,,,,,,,,,,,,
.
अनु
मे मरती ही रहूंगी और तेरे सामने मेरी तक़दीर हँसती जायेगी .......
तुम खुदा हो ,फरिश्ते हो जो भी हो
पर तुम्हारे बिन ये जिंदगी न जी जायेगी
मरना हैं रोज ,हर आह ,
हर अहसास ,तन से हो या आत्मा से
एक दिन तो मिटना ही हैं
फिर मे क्यों न मिट जाऊं तबाही के रास्तो पे ..........
जो न हो सकी मे तेरी तो अपनी होके कहा जी पाऊँगी
जानती हूँ जिस रस्ते पे बड़ी हूँ वो क्या कहा जाता हैं
नहीं मालुम मुझे पर इतना पता हैं वफ़ा का इनाम क्या दिया जाता हैं .........
आप से बेहतर किसी ने मुझे इनाम नहीं बख्शा ,,,,,,,,,,,,,,,
.
अनु
Zindagi Bhar Nahi Bhoolegi (Male)
जिसने भी ये गीत लिखा हैं
शायद खूबसूरती को सांसो से पढ़ना सीख ही लिया होगा
सुनकर ही ऐसा लगता हैं मानो
किसी ने रूह के जस्बातो को शब्दों मे उतार दिया हैं ,
जेसे हर शब्द जीने को मजबूर करता हैं कहता हैं जिंदगी को तुम एक बार फिर जी लो ..........अनुभूति
Zindagi Bhar Nahi Bhoolegi (Male)
जिसने भी ये गीत लिखा हैं
शायद खूबसूरती को सांसो से पढ़ना सीख ही लिया होगा
सुनकर ही ऐसा लगता हैं मानो
किसी ने रूह के जस्बातो को शब्दों मे उतार दिया हैं ,
जेसे हर शब्द जीने को मजबूर करता हैं कहता हैं जिंदगी को तुम एक बार फिर जी लो ..........अनुभूति
तेरी प्रीत की रित हैं अनोखी
मेरे कृष्णा !
तेरी प्रीत की रित हैं अनोखी
जो तेरा ,वो दूर खडा हैं तुझसे कोसो
जगत ,दुनिया पा जाएँ तेरे चरणों का सुख
और में बावरी तरसा किये हूँ तुझे
सुनने को ,बतियाने को
केसी सजा हैं प्रीत की अनोखी !
तिल-तिल का विरह में न पाऊं
आस ये ही अब में इस संसार से मुक्ति पाऊं
क्या करू चाह तेरे दर्शन की मन में
जब तू सारे संसार की कठोरता
मेरे लिए ही ओड़े बैठा हैं
दे दे मोक्ष मुझे अपने चरणों में ........
श्री चरणों में अनु
सदस्यता लें
संदेश (Atom)
तेरी तलाश
निकला था तेरी तलाश में भटकता ही रहा हुआ जो सामना एक दिन आईने से , पता चला तू तो ,कूचा ए दिल में कब से बस रहा ................



