मंगलवार, 26 अप्रैल 2011
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तेरी तलाश
निकला था तेरी तलाश में भटकता ही रहा हुआ जो सामना एक दिन आईने से , पता चला तू तो ,कूचा ए दिल में कब से बस रहा ................
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निकला था तेरी तलाश में भटकता ही रहा हुआ जो सामना एक दिन आईने से , पता चला तू तो ,कूचा ए दिल में कब से बस रहा ................
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मेरे राम ! जिस रूप में तुम आओ मेरी इन अखियन के सामने मैं मन्त्र मुग्ध सी देखती ही जाऊं केवल तुम्हारे चरण के धाम को सारा संसार होगा मुग...

2 टिप्पणियां:
एक बार श्याम की दुल्हन बनने के बाद और क्या चाहिये।
बहुत गहन भक्ति और समर्पण भाव से ओतप्रोत सुन्दर प्रस्तुति..
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