रविवार, 27 नवंबर 2011

शुक्रवार, 25 नवंबर 2011

नीर भरे नयन करूँ,
क्या में तुमसे क्या कहूँ सजन

मेरा मासूम मन कभी न समझ सका,
दुनिया की रीत 
ओ सजन !
वो तो पत्थर की मूरत को भी मानअपना 
करता रहा सदा ,
इन अश्रुओं से चरण  वंदन 
खोट कही मेरे साधना मे ही 
भक्ति में ,तपस्या मैं ही 
जो पा न सकी अपना प्रियतम 
सब कुछ हैं ,पर कुछ भी नहीं 
न पायल ,चूड़ी ,सिंदूर सजन 
खनकती चूड़ियों ही में उसके पास
भटकती रही ले मन की प्यास 
वो मुझे ठुकराता रहा ,
मासूम मन जान न सका ये बात 
जान नहीं सकी अपने और उसके बीच के 
बड़े  धरती -आकाश के अंतर की बात 
मेरा मासूम मन बस इन नीर भरे नैनों से उसे 
 पूजता ही रहा ,दुआए देता ही रहा 
पर वो मुझे खोजता ही रहा 
खोफ ,डर और मुसीबत और 
न जाने किन -किन
लोगो के साथ होने की बात
न में इस दुनिया में थी, प्रियतम 
न तेरी दुनिया, मुझे समझ आई
इसीलिए तो कहती हूँ कृष्णा !
मुझे भी दे इन सांसों से छुटकारा 
ले चल अपने साथ !
ले चल अपने साथ ,हां अब तो ले चल, 
सुन तो ले एक बार बस एक बार ,कुछ नहीं मांगूंगी  में दोबार
अब तो सुन ले या कुछ और बचा हैं 
तेरा मुझको देना इन आँखों के नाम
सुन  ले न ,अब तो सुन ले हां अब  तो सुन ले सुन तो ले एक बार



















गुरुवार, 24 नवंबर 2011

पुकारती हैं तुझे मेरी आहें


पुकारती हैं तुझे मेरी आहें 
तो बहते हैं अश्क, इन आँखों से 
तेरे बिना नहीं हैं जीवन का कोई साथ 
जिन्दगी काश बया हो पाती तो 
में अश्को से बया कर देती अपनी आहो का दर्द 
जो मुस्कुराहट बन के सजा करता था मेरे लबो पे 
वो आज जखम बन के इन आखो से बहा करता हैं 
मुस्कुराहट न सही वो ज़िंदा हैं इन आसुओं में 
 मेरे रब तेरी ये मेहर ही मुझपे क्या कम हैं ......
अनुभूति



मेरे पालनहार !

मेरे कृष्णा ! 
तुने तोड़ दी ,
बिखेर दी हैं मेरी तपस्या के मोतियन की माला 
मेने जोड़ा एक -एक मनका 
अपनी आत्मा के असीम स्नेह विशवास से 
.और तुमने एक ही पल मे अपने आवेश मे बिखेर डाला |
सारा संसार एक तरफ तू मेरा कृष्णा एक तरफ 
दुनिया मुझपे तोहमत लगाये मेने सह ली 
तेरी तोहमत मुझे असीम वेदना दे जाएँ
ये क्या हैं मेरे माधव !
मुझे ना समझ आये ,
तेरी बाते तू ही जाने 
मेने कुछ नहीं कह पाऊं 
मेने सिर्फ मागी हैं तेरे चरणों की सेवा 
और कुछ मे नहीं चाहूँ 
मे जानू मेरी अखिया कभी ना तोहे भाये 
इसीलिए तू मोहे ये पीड दे जाएँ 
जो तू पड़े सके मेरे असुअन को बोली 
तो मेरी पीड समझ जाए 
धन्य हूँ मैं 
जीने को तुने कुछ तो मेरे नाम किया हैं
ऐसा कोन दूजा होगा 
जिसके क्षण-क्षण पे तुमने ये वेदना का सागर दान  किया हैं 
हां , मे अब इसी मे डूब जाउंगी 
हां अब तो करले दे म्रत्यु 
अपने श्री चरणों मे स्वीकार 
तेरी बड़ी कृपा होगी .!
मेरे पालनहार !

तेरे पगली अनुभूति




बुधवार, 23 नवंबर 2011

मुस्कुराते हो ना सदा ही मुझे रोते देख ..




मेरे माधव ! 
मुस्कुराते हो ना सदा ही मुझे रोते देख ..
मेरी आंहो मे दर्द 
और आँखों मे देके रात भर का ये नीर 
देके मुझे मुस्काओ ,
तो हंस के स्वीकार हैं 
जीवन के सारे दर्द 
मेरे कृष्णा !
सदा मेरे अंतस को चीर तुम मुस्काओं 
ये प्रीत की रीत अनोखी तुम ही निभाओं 
जो तुम संग बाधी आत्मा की ये डोर 
तो केसे तुम्हारी बन्धनी तुम कुछ कह जाएँ 
मेरे माधव ! 
मुझे तेरी एक मुस्कुराहट को ये सब स्वीकार 
ये नीर भरे ,सजल नयन करते हैं 
सदा की तरह ही तुम्हारे चरणों मे 
आत्मीय प्रणाम
श्री चरणों मे तुम्हारी अनुभूति







सोमवार, 21 नवंबर 2011

एक दिन मैं तुझसे आ मिलूंगी ,मेरे कृष्णा !

मेरे कृष्णा !
तेरी आत्मा  की धवल चांदनी से सजी हैं
तनहा जिंदगी की राहे 
केसी रहमत हैं 
ये तेरे स्नेह  की जो एक बूंद मे ही मुझे भिगो देती हैं 
समन्दर की तरह 
हां समन्दर हो तुम मेरे स्नेह का 
बस नहीं हैं जिंदगी के हालातों  पे 
मुझे नहीं पाता तुझे मैं कंहा खोजू  ?
इतना जानती हूँ कृष्णा !
मेरी तडपती आत्मा एक दिन तेरे कदमो से 
लिपट के आंसू बहा रही होगी .................
बस ,इसीलिए जी रही हूँ 
मेरे कृष्णा !
श्री चरणों मे तुम्हारी अनु






गुरुवार, 17 नवंबर 2011




ताबीर


मेरी कोई फ़रियाद
उसके कानो तक जाती ही नहीं
मेरी रूह की बेबस सदाएं ,
पत्थरों से टकरा कर मुझ तक ही लौट आती हैं |
वो धड़कता हैं
मेरी रूह मे ,सांसो मे 
पर मेरी कोई धड़कन उस तक जाती ही नहीं |
हर घड़ी ,हर क्षण
वो मुझमे उतरता हैं इबादत की तरह ,
पर मेरी कोई इबादत उसके किसी क्षण तक जाती नहीं | 
मेरा हर खवाब ,हकीकत ,
चाहत ,इबादत और हर रिश्ता हैं वो ,
जानता हैं वो, 
पर उसकी कोई ताबीर 
मुझतक आती ही नहीं |
अनुभूति

वो जो मेरा कहने को अपना हैं !


वो जो मेरा कहने को अपना हैं !
वो सँवारना चाहता हैं ,उसके सपने .
देना चाहता हैं प्यार भरा आंगन ,
वो आँगन ,
जो मेने सींचा था
अपने स्नेह की एक –एक बूंद से ,
वो कहता हैं की उसे प्यार हो गया हैं !
शायद मुझे 
बहुत पहले ही अंदाजा हो गया था
         उसे मुझसे प्यार कभी था ही नहीं   ,,,,,,,,,,,,,,,
अनुभूति

तेरी तलाश

निकला था तेरी तलाश में भटकता ही रहा हुआ जो सामना एक दिन आईने से , पता चला तू तो ,कूचा ए दिल में कब से बस रहा ................