सदस्यता लें
टिप्पणियाँ भेजें (Atom)
तेरी तलाश
निकला था तेरी तलाश में भटकता ही रहा हुआ जो सामना एक दिन आईने से , पता चला तू तो ,कूचा ए दिल में कब से बस रहा ................
-
निकला था तेरी तलाश में भटकता ही रहा हुआ जो सामना एक दिन आईने से , पता चला तू तो ,कूचा ए दिल में कब से बस रहा ................
-
मेरे राम ! जिस रूप में तुम आओ मेरी इन अखियन के सामने मैं मन्त्र मुग्ध सी देखती ही जाऊं केवल तुम्हारे चरण के धाम को सारा संसार होगा मुग...
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें