बुधवार, 13 अप्रैल 2011
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तेरी तलाश
निकला था तेरी तलाश में भटकता ही रहा हुआ जो सामना एक दिन आईने से , पता चला तू तो ,कूचा ए दिल में कब से बस रहा ................
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ये कविता किसी बहुत बड़े दार्शनिक या विद्वान के लिए नही है | ये कविता है घर-घर जाकर काम करने वाली एक साधरण सी लड़की हिना के लिए | तुम्...
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कई बार ऐसा मोड जीवन में आता हैं की जिसके लिए हम जी रहे होते हैं उसे भी कोई अंदाजा नहीं होता की उसकी हमारी जिंदगी में क्या अनमोल जगह हैं ,इस...

2 टिप्पणियां:
bahut khoob
badhiyaa
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