मंगलवार, 1 नवंबर 2011
सोमवार, 31 अक्टूबर 2011
रविवार, 30 अक्टूबर 2011
शनिवार, 29 अक्टूबर 2011
शुक्रवार, 28 अक्टूबर 2011
रसात्मिका

रसात्मिका
तेरी पनाहों में जिंदगी दर्द भूल जाती हैं ,
दे जाती हैं कुछ पल अमिट स्मृतियों को
मैं आत्म विभोर हूं .....................
तेरी रहमतों से मेरे माधव !
तेरी इन सुकून भरी स्नेह की चांदनी में
में खिलती हूं जो चाँद खिला हो अमावस
तुम्हारा असीम स्नेह फूटता रहता हैं मेरी रूह से
इस आत्मा से निकले शब्दों से ......................
हां ,इसीलिए तो हूं
और तुम कहते हो मुझे रसात्मिका
मैं हूं !
तुम्हारी रसात्मिका ......................................
श्री चरणों में अनुभूति
सोमवार, 24 अक्टूबर 2011
में रूठी हूँ तुझसे ही आज

ओ मेरे कृष्णा !
में रूठी हूँ तुझसे ही आज ....
सब कुछ एक ही पल में छीन लिया तुमने मुझसे
मेरी आत्मा ,मेरे शब्द ,मेरे अहसास ,
मेरा स्नेह सागर
मेरी आत्म आनंद अनुभूतियाँ ...............
फिर भी न जाने क्यों लगता हैं मुझे
सुन रहे हो मुझे ,देख रहे हो
महसूस कर रहे हो मेरी हर पीड़ा को
और धडक रहे हो मुझमे ही .............
चीर दिया हैं तुमने मेरी आत्मा का अंतस
अब इन आखो से अश्क नहीं ,दर्द फूटता हैं
और पल -पल तुम्हारे कदमो पे गिरता हुआ
तुम्हे पुकारता हैं मेरे माधव ......................
जीवन का कोनसा रूप दिखा रहे हो तुम ,
कोनसी नयी सीख दे रहे हो
मुझे मेरे श्याम ......
मेरे कोस्तुभ धारी रूठी हैं तुमसे आज
तुम्हारी ये बावरी,पुकारती है तुम्हे
चले आओ मेरे माधव ............
अनुभूति
में रूठी हूँ तुझसे ही आज ....
सब कुछ एक ही पल में छीन लिया तुमने मुझसे
मेरी आत्मा ,मेरे शब्द ,मेरे अहसास ,
मेरा स्नेह सागर
मेरी आत्म आनंद अनुभूतियाँ ...............
फिर भी न जाने क्यों लगता हैं मुझे
सुन रहे हो मुझे ,देख रहे हो
महसूस कर रहे हो मेरी हर पीड़ा को
और धडक रहे हो मुझमे ही .............
चीर दिया हैं तुमने मेरी आत्मा का अंतस
अब इन आखो से अश्क नहीं ,दर्द फूटता हैं
और पल -पल तुम्हारे कदमो पे गिरता हुआ
तुम्हे पुकारता हैं मेरे माधव ......................
जीवन का कोनसा रूप दिखा रहे हो तुम ,
कोनसी नयी सीख दे रहे हो
मुझे मेरे श्याम ......
मेरे कोस्तुभ धारी रूठी हैं तुमसे आज
तुम्हारी ये बावरी,पुकारती है तुम्हे
चले आओ मेरे माधव ............
अनुभूति
तुम याद आते हो !

ढलते हैं अश्क इन आँखों से,
जब तुम्हारे कदमो पे
मुझे तुम याद आते हो ,
इस दुनिया से जुदा हो तुम ,
न जाने क्यों अहसास दिला जाते हो
तुम कहते थे
मुझे मेरे शब्दों में मेरी आत्मा फूटती हैं
नहीं इन से तुम फुट पड़ते हो
हां जब मेरा अंतस चीर जाता हैं
जब तुम याद आते हो
कँहा खोगये हो मेरे कृष्णा !
तुम मुझसे इस दुनिया की भीड़ में
किसे पुकारू
मेरे माधव !
तुम ही तो हो जो बसे हो मेरे रोम -रोम
हां फुट पड़ती हैं आँखे
आज भी जब तुम याद आते हो
श्री चरणों में अनुभूति
मेरी ये इबादत हैं ये मुझे पता हैं ,
रविवार, 23 अक्टूबर 2011
खुदा
जो किसी दिल में आह हो ,
आँखोंमें किसी के अश्क हो
समझो लो तुम्हारा खुदा
तुम्हारे सामने खड़ा हैं !
अनुभूति
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