मानव तन के साथ परमात्मा ने अपने ही अंश के स्वरूप सबको एक पवित्र आत्मा से अलंकृत किया है ,
उन्ही अलंकारों की जीवन अनुभूति है रसात्मिका |
सबकुछ समाप्त होता हैं पर प्रेम यात्रा करता है
अपनी दिव्य चेतना के साथ
इस लोक से परलोक
वही यात्रा है रसात्मिका
बुधवार, 17 फ़रवरी 2010
पूछे लोग गुरु बिना क्या मिले ज्ञान ?
कहू कैसे आप को श्रीमान पहले गुरु बना ले किसो को ,फिर मान अपना उद्धार .
ना होता ऐसा कुछ तो राम करते ना अहिल्या उद्धार ,ना होता एकलव्य महान|
1 टिप्पणी:
गुरु गोबर दोउ एक से देखत में घिनियायं,पडे पडे भी खेत में कछु ना कछु दे जायं॥
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