रविवार, 1 मई 2011

रूठी जो राधा

ओ कान्हा !
हर बार रूठ जाओ तो मनाये राधा ,
इस बार रूठी जो राधा मना न सकोगे ,
हर बार तुमने गिराई हैं पगली की आँखों से 
अश्रु धार , अबके माने नहीं राधा 
तू बजाये मुरली कितनी ही,
न माने अब  तो राधा 
न माने  अब तो राधा 
तुम्हे श्याम अब तो साकार 
रूप दिखाना ही होगा अपनी,
पगली राधा को मनाना ही होगा ,
न आये श्याम ,बनवारी तो इन ही चरणों में 
पड़ी पड़ी दम तोड़ देगी तुम्हरी राधा रानी |

अनुभूति

तूफ़ान के बाद की ख़ामोशी

तूफ़ान के बाद की ख़ामोशी 
ज्यादा तबाही दिखाती हैं 
एक खामोश ,सरल सी,
दिखने वाली लहर भी तूफ़ान उठाती हैं |
शांत दरिया की वो खुबसूरत मौज 
जो कभी साहिलों के गीत  गाती थी 
आज तबाही का ये आलम दिखाती हैं 
तबाही के बाद अब कुछ नहीं बचा ,
खंडहर हो गए बुत और इंसान 
सब कुछ खाली हैं दिलो की तरह 
क्यों आते हैं तूफ़ान ,
कभी शांत  दरिया किनारे बैठ के सोचना
कही ये किसी लहर की बगावत तो नहीं |

अनुभूति

जीवन पथ

बड़ी कठिन हैं इस जीवन पथ पे आराधना तुम्हारी 
कुछ पल सपने , कुछ पग काटे ,कुछ पग  फुल 

हर पल नया पाठ -नयी सिख दे मुझको 
बतलाएं  अंतिम सत्य मेरा
हर बार कहे राम मुझे पग -पग थाम 
बिन सोचे चली आ मेरे चरण धाम

भ्रम टूटे मन के एक पीड़ा मन में उठ जाए 
एक बार कहू कुछ नहीं बस अब मर जाए 

मेरे प्रभु ,
पर हर बार सामने खड़े साक्षात मुझे कहो क्यों ?
पगली साथ खड़ा हूँ में तेरे  तेरा राम |

क्यों विचलित हैं क्यों परेशान ?
विशवास रख नियति ने लिखा हैं तुझसे कोई बड़ा काम |

वो कर्ज अभी जीवन का चुकाना हैं फिर आना मेरे धाम |
मेरे राम , मेरे राम
बड़ा आलौकिक अहसास हैं पास कुछ नहीं फिर भी जीवन का एहसास हैं |
ह्रदय के तीक्ष्ण दर्द के साथ , सब कुछ साफ़ हैं |

":अनुभूति "