रविवार, 27 मार्च 2011

कि ये खूबसूरत ख्वाब तुम्हारा ही है

प्रिये

हमेशा 
ये खुबसूरत ख्वाब,
पूरा होने से पहले ही,
क्यों अपनी आँखे खोल लेती हो तुम ,

मुझे हकीकत बनकर,
दिल की दहलीज़  तक आने से,
पहले ही 
क्यों रोक देती हो तुम ?.

क्यों तुम्हे यकीन  नहीं 
कि ये खूबसूरत ख्वाब तुम्हारा ही है ,
इस ख्वाब को तुम्हारा होने के लिए.
क्या - क्या परीक्षाएं देनी होगी |

प्रिये 
कभी तो अपनी किस्मत पे भी यकीन  करो,
ये हंसी ख्वाब तुम्हारा है ,
और सदा तुम्हरा ही रहेगा,

बस तुम्हारा |