शनिवार, 19 मार्च 2011

रात बन बेठी हैं चाँद का घूंघट



रात बन बैठी  है चाँद का घूंघट .
और इस चाँद केघूंघट  में ,
राधा को इन्तजार 
अपने कान्हा का , 

 कि कान्हा आयेंगे 
और उसके चाँद से मुख से घूंघट  उठायेंगे . 

इस आस में राधा करे इन्तजार 
 अपने कान्हा का ,
कर सोलह सिंगार |

वो कान्हा बड़ा निर्मोही ,
जब भी राह तके राधा ,
वो दे अंखियन को आंसू .

और जब आए सामने 
राधा दे मुस्काय
ओ कान्हा 
तेरी राधा बड़ी पगली ,दीवानी 
तू काहे सताए  करके मनमानी ,

ये रात नहीं आएगी दोबारा 
कि कान्हा आज सजी है घूंघट  में 
तेरी चांदनी राधा |