शुक्रवार, 18 मार्च 2011

श्याम आज तो होरी

मन का मयूर नाचे छम - छम 
के आगये राधा - रानी तेरे प्रीतम.

आज वो तुझे छू जायेंगे |
मन की हर कसमसाहट  मिटा जायेंगे |

अरे पगली ,
कान्हा के आने से
पहले करले  सोलह सिंगार
पैरों  में पायल ,
सांसो में सरगम और 
दिल में कान्हा को बसाये ,
आज तो तू धड़का दे तन मन श्याम का ,
अपने घनश्याम का .

कान्हा  तो काला,
और तू राधा चाँद चकोरी 
कान्हा कँहा टिक पाएंगे ,
आज तेरे घनश्याम 
कि आज तो होरी है .
और कान्हा की राधिका कोरी हैं |

तो काहे लजाएँ अपने श्याम से 
आज तो रंग लगाने दे ,
अंग - अंग भीग जाने दे,
 रंग में रंग ,और मन से मन,
आज मिल जाने दे ,
राधिका गोरी 
अब खुल के बोल ,

हाथ गुलाल रंग बिरंगी ले कर बोल,
कि  श्याम आज तो होरी हैं |
ये राधिका तोरी हैं |

पट तो गै रानी

गोकुल के घनश्याम
मीरा के बनवारी

हर रूप में तुहारी छवि
अति प्यारी

मुरली बजाके 
रास -रचाए |
और कह ग्वालों से 
पट तो गै रानी

अरे कान्हा ,
मीरा तो प्रेम दीवानी 
और राधा दरस दीवानी 

दोनों ही तेरे अधीन ही
फिर तू काहे कहे
पट तो गै रानी|

वो महासागर

मेरा हर एक अश्क
 हर बार एक नया सवाल पैदा करता हैं|
क्या दुनिया वेसी हैं ?
सुनहरी जेसी हर तरफ दिखाई देती हैं 
या 
दो रंगों वाली ,
सुनहरे पलों वाली या ,
उसके पीछे छिपी  ,
बिलकुल काली और स्याह ,

एक  नन्ही सी बूंद
क्या समझ पायेगी इस दुनिया के महासागर को ?
नहीं इन्ही अनसुलझे सवालों में 
डूब जायेगी वो !
इस दुनियां के महासागर में ,
खो जायेगी कही ,
अपने अस्तित्व को सागर में डुबोये ,
और नन्ही - नन्ही बूंदों से
ही तो भरा होगा सागर,
और कहलायेगा 
वो महासागर|