सोमवार, 24 अक्तूबर 2011

तुम याद आते हो !


ढलते हैं अश्क इन आँखों से,
जब तुम्हारे कदमो पे
मुझे तुम याद आते हो ,
इस दुनिया से जुदा हो तुम ,
जाने क्यों अहसास दिला जाते हो
तुम कहते थे
मुझे मेरे शब्दों में मेरी आत्मा फूटती हैं
नहीं इन से तुम फुट पड़ते हो
हां जब मेरा अंतस चीर जाता हैं
जब तुम याद आते हो
कँहा खोगये हो मेरे कृष्णा !
तुम मुझसे इस दुनिया की भीड़ में
किसे पुकारू
मेरे माधव !
तुम ही तो हो जो बसे हो मेरे रोम -रोम
हां फुट पड़ती हैं आँखे
आज भी जब तुम याद आते हो
श्री चरणों में अनुभूति

मेरी ये इबादत हैं ये मुझे पता हैं ,

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