शनिवार, 24 जुलाई 2010

तुम्हारे वादे ,

तुम्हारे वादे , 

एक आस जिन्दगी की ,और
तुम्हारे वादे ,

जिन्दगी का फलसफा यही है,
तुम्हारे वादे .

तुम्हारे स्वप्न सुकून देते हैं
 और , तुम्हारा साथ वेदना .

एक डर , 
हाँ एक डर 
मुझे हर पल सताता हैं ,
कि कही तुम, मुझसे बिछड़ ना जाओ |

तुम्हारे इन वादों पे यकीन करना,
तो जिन्दगी चाहती हैं .

पर हर आने वाले पल की आहट
फिर भी मुझे डराती हैं |

तुम्हारी साँसे मुझे 
हर पल विश्वास दिलाती हैं, 
फिर भी हमनशीं  मेरे ,
ये दुनिया मुझे पल -पल डरती हैं|

क्या सत्य हैं ? 
तुम्हारी सांसे या 
तुम्हारे वादे ?

इसी  ख़ुशी और गम 
में  जिन्दगी बिताती हूँ |

हाँ 
फिर भी एक आस जिन्दगी की और तुम्हारे वादे !


-- अनुभूति 

शुक्रवार, 23 जुलाई 2010

जीवन -संगीत




एक झोंका हवा का और ,
और ,तुम्हारी आहटें .

एक पल और ,
और , तुम्हारी चाहतें .

तुम्हारी आहटें ,
और 
जिन्दगी के गीत .
अब तो दोनों बन गए हैं 
मन -मीत .

मेरी खनकती पायल ,
और 
तुम्हारे गीत ,
यही तो है  मेरा 
जीवन -संगीत.

-- अनुभूति 

बुधवार, 21 जुलाई 2010

प्रेम


प्रेम नहीं माँगता किसी से ,
बदले में कोई प्रेम 
प्रेम नहीं माँगता कोई सम्बन्ध
प्रेम तो समर्पण हैं ,
जो सिर्फ देना जानता.

किसी स्वीकारोक्ति की कोई जरुरत  नहीं ,
इस असीम अनुराग में ,
तुम कहो ना कहो ,
पर , तुम यही तो धड़क रहे मुझमे सदा ,

  तुम तो निराकार
  न  कभी तुम मरे ना कभी तुम मरोगे,

 क्योकि तुम तो जीवित हो मुझमे सदा |


-- अनुभूति 

शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

आँख -मिचोली


पलकों पे  सपने सजाता हैं जीवन ,
तुम्हारे आने से गाता है जीवन .

 खामोशियों से जब तुम मेरे करीब आक
 निकल जाते हो , 
मै तुम्हारी उसी खुशबू  में महक जाती हूँ .

 किसी पौधे  में पानी डालते -डालते 
जब गुनगुना रहे होते हो ,
 वहीं बहती  हवा बनकर झूम रही होती हूँ मै,

और तुम जब महसूस करने लगते हो मुझे,
एक लहर बन कर उड़ जाती हूँ मै |


-- अनुभूति 
                          

शनिवार, 10 जुलाई 2010

मेरे अस्तित्व का सपना |



रोज सिरहाने रख कर सोती हूँ
  एक सपना ,
हां , एक सपना.

 तुम्हारे  नन्हे , नन्हे हाथो का
  तुम्हारी नन्ही आँखों का
        और, तुम्हारे दुलार और  स्पर्श का .

 दुनिया में  सब से प्यारा और
  सब से मासूम एक सपना,

  तुम्हारे इस दुनिया में आने का सपना ,

      दुनिया में इससे ख़ूबसूरत  कोई सपना नहीं.

    इसीलिए पलकों को थामे इन्तजार कर रही हूँ
      तुम्हारे आने का  ,
   हां मेरे ,पुरे होने का , 

मेरे अस्तित्व का सपना |


-- अनुभूति 

अस्तित्व




आत्मा अमिट हैं 
जानती हूँ मै
इसीलिए बिना इकरार,बिना वादे के,
      फिर भी मानती हूँ ,

 तुमको तो इकरार ,
इनकार में  बदलने का डर होता है .

और वादा फिर भी टूट जाने का डर
    तुम में ही अपने को डुबोकर 
पाया हैं  मैंने अपने आप को.

 कही कुछ खो जाने का  डर नहीं
 ना ही कुछ टूट जाने का,\
 क्योकि, मैंने  कुछ साथ बांधा ही  नहीं,

मैंने तो डुबो दिया हैं अपने को ,
तुम्हारे अस्तित्व में ,
  हां उस निराकार ब्रह में
  यानी तुममे |
  इसीलिए तुम तो सदा साथ हो,

 सदा साथ थे और सदा रहोगे |
   तो क्योकि मेरा तो अस्तित्व ही नहीं तुम्हारे बिना !

-- अनुभूति 

ख़ामोशी

आप की  ख़ामोशी भी ,
   मेरी जिन्दगी की एक अदा हैं
                मुझे आप कहे ना कहे ,
                          पर यूँही ख़ामोशी से मेरे साथ चलते रहना भी आप की  वफ़ा हैं |
             यूँही तडपना और अपनी ही  जिन्दगी से
                                   अपनी शिकायत करना ,
                 ये कुछ ना कह कर भी मेरे लिए चुनी गयीं एक  सजा हैं |
                                    आप की ख़ामोशी से शिकायते नहीं ,
                                              पर अपनी ही जिन्दगी से यूँही शिकवा करना ,
                                                         मेरी ही आँखों को आंसुओ  से नम करना हैं | |

शुक्रवार, 9 जुलाई 2010

मन के तार

मन के तार उसी से जुड़ते हैं ,
                            जो जाने मन
        तन की परिभाषा से,
                         कोसो दूर हैं मन
              ये जो जाने ,
                         वो ही जाने  मन को |
               मन दर्पण हो तो जाने मन ,
                                                      मन को
              क्या कहू जब सब कुछ बिन
                          बोले ही समझ लेते हो इस मन को !

मंगलवार, 6 जुलाई 2010

हम कहे ना कहे विशवास और आत्मा से सदा साथ ही हैं क्यों समझते हो दूर हूँ ?नहीं करीब ही हूँ सदा जीवन की अंतिम सांस तक ,हां साँसों का ऐतबार यूँ ही टूट जाएगा क्या ?
तुम्हारे सवालों का जवाब मै मेरी खमोशी तुम्हारे साथ मेरे होने का एहसास ही तो हैं |

बुधवार, 30 जून 2010

खुदाई

जिनके पास चाहत  होती हैं 
,जिन्दगी भी उन्ही के पास होती हैं |
कोन कहता हैं, टूटा हुआ आइना फिर से जुड़ नहीं सकता!
उसे जोड़ने की खुदाई तो बस प्यार करने वालो के पास होती हैं |
       रूह मै उतर कर रूह को जान लेने की बात ही तो सच्ची  खुदाई होती हैं ,
                   कोई समझे ना समझे ,वो समझ गया ये ही तो ये ही तो उसकी रहनुमाई होती हैं |
      जिसने समझा चाहत को ,उसी ने जाना खुदा को ,
          केसे बातये हम की किसी को चाहना ही सबसे बड़ी खुदाई हैं |

मंगलवार, 29 जून 2010

तुम्हारी ख़ामोशी  मेरे हर सवाल का जवाब हो ती हैं |
हमेशा मेरे हर सवाल के जवाब मै
तुम खामोश रहकर कह देते हो पगली क्या ढूंढ़ रही हैं ?
मै यही तेरे साथ .तेरे पास तो खड़ा हूँ |
हां तुम तो मेरे रोम रोम मै हो हर अंतस मै  मेरे राम राम |

तेरी तलाश

निकला था तेरी तलाश में भटकता ही रहा हुआ जो सामना एक दिन आईने से , पता चला तू तो ,कूचा ए दिल में कब से बस रहा ................