मंगलवार, 9 जुलाई 2013

महकती महेंदी से .... मेरे स्नेह की तक़दीर ....

मेरी रूह के रंगरेगज !
मेरे माधव !
तुमने ही लिखी हें महकती महेंदी से ....
मेरे स्नेह की तक़दीर ....
सुर्ख महरून रंग में ,रंग गयी हैं जिंदगी अब
खनकती चूडियों के साथ ये मेहँदी से सजे हाथ
अपलक प्रतीक्षा करते हैं तुम्हारी पीया ......
चले आओ न ...
अपने हाथो में थामे हाथ देख तो लो
केसा चड़ा हैं मेरे इन हाथो पे तुम्हारी स्नेह की मेहँदी का रंग ,,,,
इसलिए तो हूँ अनुरंजनी तुम्हारी ,,,,,,
हाथो में खनकती सिंदूरी चुडिया ,,
हाथो में तुम्हारे स्नेह की मेहँदी
और मस्तक पे कुमकुम का तुम्हारे विशवास का
रक्त कुमकुम बिंदु ,,,
और तन पे सजता मेरे ये गुलाबी रंग
अहसास दिलाता हैं मुझे
तुम कही भी रहो ..
परिणीता हूँ तुम्हारी .......
तुम्हारी अनुभूति श्री चरणों में ,,,,,,,
पग छूती हैं तुम्हारे इन महकते हाथो से ....
स्वीकारो गिरधर ये प्रणाम ..........