रविवार, 7 जुलाई 2013

हूँ तुम्हारी ही कृष्णा !

मेरे कृष्णा !
तुम जो होठो पे धर लो
तो हूँ मैं
रागिनी तुम्हारी ...
तुम जो रंग लो
सिंदूरी रंग में तो
हूँ मैं 
अनुरंजनी तुम्हारी ....
तुम जो बिन कहे भी
निभा लो मुझे
तो हूँ मैं
 परिणीता
तुम्हारी कृष्णा !
श्री चरणों में अनुभूति