मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

खाहिश हैं !

ऐ खुदा !
 ये जिन्दगी की कैसी जिद हैं !
.कैसी फरमाइश हैं !
जिसकी मोहब्बत में मरने की आदत हैं 
उसी के शाने पे सर रख के रोने की खाहिश हैं ।
वो बंधा हैं उसूलो से ,करता हैं मोहब्बत अपने ही रूह  से 
या खुदा ,ये कैसी तेरी  इबादत की खाहिश हैं ।
जलना ,मिटना ,मरना भी मंजूर हैं 
जिन्दगी तेरे  नाम पे लिख के गवा देना भी मंजूर हैं 
हां पर तुझे से तेरी ही मोहब्बत के इकरार की खाहिश हैं ।  
मेरे अल्लाह !
ये कैसी मोहब्बत हैं मेरी. जिसमे जिंदगी फना करने की खाहिश हैं 
जिसका वजूद भी नहीं मोजूद उसी {खुदा }की चाहत में मर जाने की खाहिश हैं ।
मेरे मालिक !
 मुझे अता कर रूहे ऐ सुकून 
इस जिंदगी मेंतेरी ही मोहब्बत में जीने की ,मरने की ,जलते रहने की 
और  बस तेरे ही कदमो की इबादत की खाहिश हैं ...................

   

यथार्थ सत्य

    मेरे माधव !
कैसे हैं जटिल प्रणय पाश तुम्हारे 
आलिंगन हैं फिर भी क्यों प्यासे हैं
हम इस तृष्णा के मारे 
तुम चन्दन में तो धुल भी नहीं 
तुम सागर में तो नीरभी नहीं 
मिलन तो हैंये सिर्फ आत्मा का 
यथार्थ के धरातल पे कही कुछ नहीं 
सब कुछ तो बिखरा पड़ा हैं 
मेरा ही अंतस मुझसे लुटा पड़ा हैं 
मेरे माधव !
कैसी हैं ये तेरी प्रीत !
न मुझसे तेरी ये पीड सही जाए 
न अपने मन की बतिया कहे बिना रहा जाए 
काश ख्यालो के बहार भी कोई सच मेरे लिए रहा होता 
कृष्णा ,कभी तो कोई रूप धार के मेरे लिए भी खड़ा होता 
कुछ नहीं हैं ,कोई नहीं हैं मेरे लिए 
ये सब बहुत कड़वा हैं 
लेकिन अब विषादो से डर नहीं 
कोनसा मन का कोना इनसे खाली पड़ा हैं 
तुम बस अपने ही मथुरा में हँसते रहो 
और में तुम्हे मुस्काते देख यूँ ही दम तोड़ दूँ 
बस ये ही जिंदगी का यथार्थ सत्य हैं 
मेरे माधव !

रविवार, 22 अप्रैल 2012

हे माधव !मेने पकड़ रखे हैं तुम्हारे ये चरण

  मेरे माधव !
मेने पकड रखे हैं
 अपने दोनों हाथो से तुम्हारे ये चरण 
कोई विषाद नहीं घेरता मुझे जब तुम होते हो साथ 
में धन्य हूँ !
पाकर तुम्हारे असीम ,अनंत ,निराकार स्नेह को 
तुम्हारी ही तरह असीम और धवल हैं 
तुम्हारी होठो की मुरली की मधुर धुन 
में जानती हूँ !
माधव !
तुम मुझे नहीं बुलाओगे 
मुझे ही ये संसार की माया छोड आना होगा 
बस कुछ एक दायित्वों को पूर्ण कर लू 
जो जिसका हैं .
उसे सौप दूँ 
फिर में चली आउंगी तुम्हारे चरणों के धाम 
मै जानती हूँ !
तुम बांसुरी बजाते रहोगे 
और मेरे जख्मो पे अपने असीम स्नेह का 
मल्हम लगाते रहोगे |
हां ,तुम्हारे इस मल्हम ने ,
असीम स्नेह ने ही तो मुझे जिन्दा रखा हैं आज तक
 इसीलिए तो माधव मेरी प्रत्येक श्वास पे तुम्हरा नाम हैं 
    हां तुम ही तो हो मेरे अखंडसोभाग्य
 हां तुम्हारे नाम का कुमकुम ही
  मेरे मस्तक पे , श्याम !
 संसार के मानव तो जन्म लेते हैं और अपनी गति को प्राप्त होते हैं 
  लेकिन तुम तो अखंड हो ,साकार होके भी निराकार हो
   इसीलिए तो में सदा सौभाग्यवती हूँ !
  और सदा खनकती हूँ !
बासंती चूडियों से 
      बजती  पायलों से और खनकता हैं मेरा रोम -रोम 
          तुम्हारी बंसी की धुन से
        हां माधव इसीलिए मेने पकड रखे हैं 
          तुम्हरे चरण कमल अपने दोनों हाथो से |
   में इस संसार में जब तक जीवित हूँ ,
      और उसके बाद तुम्हारे 
     बैकुंठ  में मुझे ,कुछ और दो न दो .
      मुझे सिर्फ दे देना 
      इन चरणों को अपने अश्रुओं से पूजने की सेवा  
 बस मेरे माधव इतनी ही अर्ज हैं तुम्हारे 
  श्री चरणों में



शनिवार, 21 अप्रैल 2012

तेरी प्रीत अनोखी

मेरे माधव !
तेरी प्रीत अनोखी 
मेरी आखियों से अमृत बन बहती जाए 
केसा हैं अनुपम स्नेह तेरा 
ये दीवानी मीरा 
संसार भूली जाए 
क्यों मानू कोई रिश्ता में इस दुनिया से 
मेरी आत्मा ,मेरी प्रीत 
मेरा स्नेह तुम हां तुम ही  तो हो मधुसुदन 
मर जाउंगी में एक दिन 
जो तुम नहीं लेने आये मोहे 
तुम्हे यूँ ही पुकारते ,पुकारते 
मेरे माधव मेरी आत्मा
तेरी हैं हैं तुझे ही अब ये समर्पित हैं जीवन 
               श्री चरणों में तुम्हारी अनुभूति

गुरुवार, 19 अप्रैल 2012

ये तेरी केसी माया हैं ,मेरे गिरिधर !



 मेरे  ठाकुर !
रोज रात आती हैं और
तुमसे मिलने की ,
तुम्हरा ही, अनुराग पाने की 
एक नयी खाहिश जगा जाती हैं ........
मेरे माधव ! 
कैसी तृष्णा हैं ये जीवन की !
जिसका अस्तित्व भी कही नहीं 'युग पृष्ठ पर "
उसकी के होने का पूर्व आभास करा जाती हैं ,,,,,,,,,,,,
ये तेरी केसी माया हैं
मै सोच सकती तो, कब का पा भी लेती 
लेकिन तुम तो कबसे सब कुछ सोचे बैठे हो !
ये आभास कराने में जिंदगी कितना वक्त लगा जाती हैं ..................
मेरे  गोविन्द !
इतना जान लिया मेने आज
तुम कहा से कब .क्या कर दो तुम ही जानो 
हम दुनिया वाले तो बस तुम्हारी लीला देखते ही रह जाए 
और जिसपे बीते वो आश्चर्य से 
तेरी भक्ति के सागर में डूब जाए 
ये तेरी केसी माया हैं ......................
श्री चरणों में अनुभूति


मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

रूह को छूते हर अल्फाज के साथ ये सुहाना नगमा .......

जो थामो तुम ये हाथ

मेरे माधव !
लाज से में मर ही नजाऊं ,
जो थामो तुम ये हाथ 
मेरे मुरली मनोहर !
मै  तो तेरी मुरली की धुन से ही 
अपनी सुध बुध गवाऊं .
में दीवानी पग पायल पहन 
आत्मा के इस आनंद मिलन पे
सुख का नीर बहाऊ,
कुछ  और नहीं बचा जो 
में अब न कहने को जो में कह जाऊं
श्री चरणों में अनुभूति

गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

मै नहीं देखा करती सितारों को ,


आसमान में मेने जब भी देखा हैं .
चमकते सिंदूरी सूरज को ही देखा 
मै नहीं देखा करती सितारों को ,
 वो तो वैसे भी हजार हुआ करते हैं
सितारे हर मोड पे मुझे मिल जाया करते हैं 
लेकिन मुझे तो मोहब्बत  उसी सिंदूरी सूरज से हैं 
जो इस दुनिया में सिर्फ एक  ही हैं 
हां वो एक जिसकी रौशनी में खुदा के बंदे ही जिया करते हैं .....................
हां में नहीं देखा करती सितारों को 
क्योकि वो हजार हुआ करते हैं ,,,
मुझे मिटना ,मरना ,जल जाना मंजूर हैं 
उसी सिंदूरी सूरज की रौशनी में मोहब्बत में ..............
हां इसीलिए में नहीं देखा करती सितारों को 
श्री चरणों में अनुभूति

मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

कोई सरहद न दिलो को रोके ......

मेघ मल्हार





ओ मेरे प्रियतम ,
मेरे माधव !
गूंज उठा हैं सुनकर तुम्हारी धडकती साँसों की सरगम 
मेरी सांसो में मेघ मल्हार 
केसा स्नेह हैं ये प्रियतम 
जो तुम्हारे बिना बोले भी घटा बन के बरसता हैं 
मेरे रोम -रोम को महकाता हैं 
मेरी पायलो के सुरों को नयी उमंग सेसजाता हैं
उमड़ पड़े हैं आज आसमान पे आज 
ये काले -काले मेघ
आज तुम्हारे सुरों से 
हां माधव ,
मेरे मुरली मनोहर !
तुम्हारी सांसो की मुरली से 
ही तो धड़कता हैं मेरा जीवन 
हां झूम उठा हैं वसंत और फाग एक साथ 
केसे कहूँ माधव !
क्या हैं तुम्हारी धड़कन और तुम्हरा जीवन मेरे लिए 
मेरी साँसे, मेरे प्राण , मेरा चिंतन 
मेरी भक्ति ,मेरा सम्मान 
सभी कुछ तुम हो तो माधव 
मेरे मन के प्रियतम 
श्री चरणों में अनुभूति

शनिवार, 7 अप्रैल 2012

ओ मृगनयनी !

ओ मृगनयनी !
प्रिय ,
तुम कोन हो !
जो रोज चली आती हो मेरे स्वप्नों के द्वार
धीमी -धीमी पायलों की मधुर पदचाप के साथ
क्यों तुम रोज मेरे नैनों में समाती हो .
तुम जो भी हो
अप्सरा हो या परी हो
अब न इस चातक को यूँ तरसाओ
यूँ रोज न मेरे नींदों को चुराओं
हां अब चली आओ .चली आओ ............
दुल्हन बन मेरे घर आँगन के द्द्वार
अब नहीं होता मुझे
स्वप्न प्रणय
और तुम्हरा ये इन्तजार
हां चली आओ अब
मेरे घर आँगन के द्वार ,,,,,,,,,,,,,
तुम्हारी हर घड़ी ,
हर पल प्रतीक्षा हैं
मुझे ओ मृगनयनी
अनुभूति

रूह को छूते हर अल्फाज के साथ ये सुहाना नगमा .......


श्री चरणों में अनुभूति

शुक्रवार, 6 अप्रैल 2012

पूनम की इस खूबसूरत चांदनी में एक गीत माधव चरणों में ,,,

मेरे अनोखे प्रियतम ,ओ मेरे गिरिधर !





 ओ मेरे गिरिधर !
ये पूनम का चाँद सोने नहीं देता मुझे ,
तुम्हारी ही तरह ताका करता हैं एक टक मुझे 
और तुम ,तुम बस खामोश से देखते ही रहते हो 
काहे नहीं छेड़ते कोई धुन 
हां कोई धुन अपने होठो की मुरलिया की 

जानते हो ,माधव 
बड़े निष्ठुर हो तुम 
संसार  के जगदीश्वर और मेरे प्रियतम !
इस सुहानी रात भी बस पत्थर बन ताका ही करते हो 
कहते नहीं ,कभी कुछ 
मेरी रूह ,मेरी ये मादकता तरसती हैं 
प्रिय तुम्हारे आलिंगन को 
और तुम सदा ही कहा करते हो 
ठहरो सखी ,इन्तजार 
तुम्हे ये धरती छोड ,
मेरे साथ इस आकाश पे ही आना हैं .............


माधव !
तुम और तुम्हारी खामोश बाते 
और मेरे स्वपन 
कही अधूरे ही न रह जाए 
अधूरा ही न रह जाएँ ,
प्रियतम!
 हमारा मिलन ,बस ये सोच के रोज घबराती हूँ
सोचती हूँ संसार मुझे बावरी कहता हैं 
जो में तेरी खामोश पत्थर की मूरत से बतियाती हूँ 
तेरे कदमो मै बैठ के सब कुछ कह जाती हूँ 
जिस  रास्ते पे मै बड़ी जा रही हूँ 
बस सोचती हूँ 
तुम कही अब मेरा साथ देते -देते रूठ ना जाना 
में  तन्हा रह जाउंगी 
मेरे अनोखे प्रियतम तुम बिन 
तुम्हारी अनुभूति तुम्हारे श्री चरणों में ,,,,,,,,,,,,,
इस पूनम की चांदनी में मुस्कुराते हुए तुम्हारे ख्यालों में





बुधवार, 4 अप्रैल 2012

मोगरे के फुल तुम्हारे कदमो के लिए





   मेरे माधव !
मै आज चुन लायी हूँ
भीनी -भीनी खुशबु से भरे मोगरे के फुल
 तुम्हारे कदमो के लिए .........
मेरे पास तुम्हारे अनन्य अनुराग के
बदले और कुछ नहीं हैं
प्रियतम !
भटकती एक नदी को अंतिम
सागर देने वाले भी तुम ही तो हो ,कृष्णा
मुझे बस प्रतीक्षा हैं
तुम्हारे मेरे बीच की उस तपस्या  की
जो तुम्हारी आँखों में
मेरी प्रतीक्षा बन खड़ा हैं
और मेरी साँसों में जिंदगी बन चल रहा हैं ,,,,,,,,,,
तुम पत्थर की उस मूरत से भी मुझसे इतना बतियाते हो
मेरी आँखों में अपनी खामोश जुबा से ना जाने कितने खाब बुन जाते हो
मेरी प्रीत ही मेरी श्रद्धा हैं
पूजा हैं ,तपस्या हैं माधव
और कुछ नहीं हैं मेरे पास तुम्हे देने को
हां इसीलिए मै चुन लायी हूँ
भीनी -भीनी खुशबु से महकते
 मोगरे के फुल तुम्हारे कदमो के लिए ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
            श्री  चरणों में तुम्हारी मुस्कुराती हुयी अनुभूति

रविवार, 1 अप्रैल 2012

Tu Pyar Ka Sagar Hai [seema] 1955 www.pay2earn.com

एक कठपुतली तेरी माधव !


श्री चरणों में अनुभूति 
तुम्हारी एक कठपुतली माधव ...........

एक कठपुतली तेरी माधव !


श्री चरणों में अनुभूति 
तुम्हारी एक कठपुतली माधव ...........

एक कठपुतली तेरी माधव !


श्री चरणों में अनुभूति 
तुम्हारी एक कठपुतली माधव ...........