शनिवार, 31 मार्च 2012

तुझे रब ने बनाया किस लिए ........

                                                                     
    हे राजीवलोचन  !
मेरे राम !
जीवन में तुम ना आते तो कैसे पाती
ये आत्मा  जीवन  सुख धाम 
लाख विपदाओ से जीवन भरा हैं 
पर आत्मा में आगन में राम नाम का कमल खिला हैं .................
मे जानती हूँ जिसने तुम्हे स्नेह से पुकारा तुम चले आये 
हां तुम अहिल्या के उद्दार के लिए भी आये थे 
और शबरी के झूठे बैर खाने को भी 

हां तुम  स्नेह से निर्बल दुखियों को गले लगाया करते हो 
इसीलिए इस संसार की मुक्ति का मार्ग 
अपने इस छोटे से "राम " शब्द में समाया करते हो 
जिस जान लिया तुम्हे ,पहचान लिया हो तुम्हे उसकी मुक्ति के 
साक्षी स्वयं तुम होंगे ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
तुम्ही से सिखा हैं मेने कठिन से कठिन विपदाओं को हँस के स्वीकार करना 
तुम्ही ने सिखा दिया हैं दुश्मनों को भी माफ़ करना 
मेरे राम !
अद्भुत सुख का सागर तुमने दिया हैं 
मेरे राम जो तुमने इस पगली के जीवन को अपने नाम से भरा हैं 
मेने पाया अपने अंतस के रोम-रोम में तुम्हारी ही छबी का आलोक
 में तुच्छ ,निर्बल मेरा  मार्ग भी तुम हो और मोक्ष भी तुम ही हो भगवन
मेरा सबकुछ तुम ,तुम्हरा तुम को ही अर्पण  
मेरे राम !
विनती ये ही
 सदा जीवन में बनकर आदित्य एक नव आलोक भरो .मेरी आत्मा में बसे  अपने सत्य और अक्ष्णु विशवास को सदा हर मुश्किल पे और प्रगाड़ करो
अपने जनम से इस दुनिया की हर अहिल्या और शबरी के स्नेह को कृतार्थ करो 
                                             मेरे मुक्ति दाता     
मेरे राम !
अपनी अनुभूति के आत्मीय स्नेह चरण वंदन  को 
                   अपनी आत्मा से सदा स्वीकार करो .............................  



   
 

मंगलवार, 27 मार्च 2012

आओ न श्याम ,









मेरे माधव !
मधुवन से आती ये महकती फिजायें 
आज तुम्हे पुकार रही हैं  
कभी तो चले आओ न श्याम 
कभी तो मेरे लिए 
इन तरसती आँखों के लिए साकार अभिव्यक्ति धरो ...
विदीर्ण हैं मन का आँगन 
लकिन मधुबन से आती ये मोगरे की भीनी -भीनी 
खुशबु होश उडाती -उडाती तोहे पुकार रही आज 
कभी तो अपने अधरों पे मेरे लिए भी मुरली धरो न 
तरस हें आत्मा मेरी आज 
तोरी सुनने को मुरलिया 
आओ न श्याम ,
आओ न ;;;;;;;;;;;;;;;;;
श्री चरणों में अनुभूति
 


गुरुवार, 22 मार्च 2012

मै बन गयी माधव ,तुम्हारी योगिनी





जीवन बन गया एक योग
और
मै बन गयी माधव

तुम्हारी योगिनी तुम्हारेअस्तित्वसेपरे ,
तुम्हारेनामसेपुकारीजातीहूँ
बिनाकिसीगुनाहकेजख्मअपनेनामकियेजातीहूँ
फिरभीसुमनबनाहैंजीवन ,
दर्दकीआहोंमेंजीनेकीचाहबडचलीहैं
हांसहते- सहतेमेतुमसंगबडचलीहूँ ,
मोक्षकेद्वारे
अपनेअंतसकीशिराओंमेंमेनेपालाहैं ,सिर्फस्नेह
निस्वार्थस्नेह ,फिरभीमेंस्वार्थीकेनामसेपुकारीजातीहूँ
जिसेनदेखाहो ,मिलाहोउसकेलिएतपस्विनीबनमिटीजातीहूँ
अगरतुमइससंसारकेसबसेबड़ेयोगीश्वर
तोमेंतुम्हारीयोगिनीबनयेजीवन,
तुम्हारेचरणोंमेंअर्पितकियेजातीहूँ
स्वीकारकरोमाधवअपनीअनुभूतिकोअपनेचरणोंमें










एक क्षितज पे

मेरे माधव !
हँसती अखियाँ आज गुनगुनाती हुंई करती हैं 
तव चरणों मे ,इस सुहानी भोर का प्रणाम 
मेरे हमदम !
लगता हैं यूँ सामने ही हूँ तुम्हारे 
और तुम बड़े टकटकी लगाये देखा करते हो 
कितना आलोकिक हैं ये सुख न प्रियतम 
जी करता हैं परियों की तरह 
तुम्हारे चारो और उडती ही फिरू 
और तुम बाहे खोले मुझे थाम लो अपनी पन्हाओं में 
मेरे माधव !
आज धरती और आकाश एक होंगे 
एक क्षितज पे 
हां ,माधव संग होगी सखी 
मेरे श्याम !
पाकर आत्मा का ये मिलन 
आत्म विभोर हूँ  
 श्री चरणों में तुम्हारी अनुभूति
 
 
 
 

मंगलवार, 20 मार्च 2012

अब तो कृपा करो गिरिधर





! प़ियाबसंती
मेरीरूहकेरंगरेज
रंगेहोधानी ,पीली ,लालचूड़ियोंसे
मेरेमनकाआँगन
मनकेमनुभीतुम
घोरतपस्वीभीतुम
उतरकेइसधरतीपेचलेआयेवोकामदेवभीतुम
हांतुमहीतुमहोमाधवजीवनकेहरनशेमे
हरसुगंधमें ,हरपुष्पमेंहरबयारमें
प़ियाफिरभीमोहेतुमसतायाकरतेहो
अपनीहीहटदिखायाकरतेहो
देखोश्याम !
जिसदिनमेंरूठगयी
,तुममोहेमनाभीनहींपाओगे
जोतुमबनगएयोगीश्वरतोमेंभीयोगिनीतुम्हारी
होतुमतपस्वी ,तोमेरातपभोतुम
गिरिधर ! गोविन्द !
अबचुपमतबेठोतुम
नहींतोमेखूबसताउंगीतोहे
भर -भरधानीचूड़ियोंवालेहाथ
बंसीले ,दूरभागजाउंगीमें
तुमसुनातेहोकोईधुनअपनेअधरोंपेरखस्नेहकीबंसीकी
मेंरूठजाऊंतुमसे
मेरेश्याम !
तुमसेनहींहमअसाधारण

जोयोगीभीबनजाएएकपलमेंऔरभोगीभी
तुम -तुमहीहोजगदीश्वर
अबतोकृपाकरोगिरिधर

नहींतोयेफूलोसेमहकीरातयूँहीढलजायेगी
औरयेपगलीतुम्हारी
राधा ,बंसीकीधुनसुनेबिनाहीरोते -रोतेहीसोजायेगी ,,,,,,,,,,,,,
श्रीचरणोंमेंअनुभूति

रविवार, 18 मार्च 2012

तुम्हारी परी


दर्द की परिभाषाओं से परे ,
सुमन बन गया हैं जीवन
और में तुमसे मिले बिना ,
जाने बिना बन गयी हूँ
तुम्हारी परी
कही नहीं हैं तुम्हारा अस्तित्व लेकिन
हर तरफ तुम ही तुम हो
नहीं हो कही ,कही नहीं थे तुम
फिर भी में तुम्हारे नाम से पुकारी जाती हूँ ,
ये भी अजीब हैं जीवन के मिलन का रंग
जिसका अस्तित्व ही नहीं उसका होना
उसी के चिर आनन्द में खोना
उसी के नाम से पुकारना जाना ,
उसी के लिए रूह पे रोज एक नया जख्म खाना
तेरी दुनिया को तू ही जानता हैं ईश्वर में
तो बस तुझी में खो गयी हूँ
और बस तुझी में विलीन होना चाहती हूँ |
श्री चरणों में तुम्हारी परी
अनुभूति

गुरुवार, 15 मार्च 2012

ये तुम चले आये हो ,


]एक लम्बी प्रतीक्षा के बाद
ये तुमचलेआयेहो ,
कीजिन्दगीयूँहमपेमेहरबानहोकेबरसगयीहैं
समन्दरकेकिनारेबेठे -बेठेबूंदकोतरसगयीथी ,
लेकिनआजजिन्दगीस्नेहकीबारिशहोकेबरसगयीहैं
पागलहीहूँमें
जोसमंदरकीपन्हाओंमेंहोके
बूंदकोतरसाकियेथी
हुआयूँआजखुदामेहरबान
जेसेआत्माकेमिलनकोआत्मा
चाँदसेचांदनीहोकेमिलगयीहैं ,,,,,,,
श्रीचरणोंमेंतुम्हारीअनुभूति


मंगलवार, 13 मार्च 2012

तुम उस पत्थर की मूरत में हो ठीक हो






मेरेमाधव !
तुमबहुतभलेहो
जोसिर्फमेरेअहसासोंऔरकल्पनाओंकेसागरमेंबसेहो
अगरतुमइसदुनियाकेलोगोकीतरहबनके
इसजमीपेआओगे
तोकभीनहींआना ,कभीनहीं
तुमउसपत्थरकीमूरतमेंहोठीकहो
जोसदाएकसीरहतीहैं
बदलतीनहीं
आईनेकीतरहसाफ़ ,
जिसमेअपनाअंतसहरकोईदेखसकताहैं
मुझेअबदुःखनहींकीतुमसाकारबनके
अपनेकदमोसेमुझेउठानेनहींआये
अगरतुमइसदुनियाकेलोगोकीतरहबनके
चलेआते ,तोशायद
मेंतुमसेभीकहीनफरतकरबैठती
लेकिनअच्छाहैंतुमकभी -नहींआये |
तुम्हेमेरीसोगंध
तुमइसदुनियामेंइन्सानबनकेकभीआना
जँहाबसेउन्हीसांसोसेअह्साओंसेअपनी
साचीप्रीतनिभाना |
मेंएकदिनहारकरतेरेकदमोमेंचलीआउंगी
लेकिनतुमइसदुनियामेंकभीनहींआना ,
कभीनहींमाधव !
कभीनहीं !
तुम्हारेचरणोंमेंतुम्हारीअनुभूतियुही
रोते -रोतेमरनामुझेस्वीकारहैं
लेकिनइनचरणोंसेउठानेतुम ,
इसदुनियाकेइंसानोंमेंनहींआना
नहींआना |
तुम्हारीहैंबसयेअनुभूति
संसारमेंनहींतुम्हारबैकुंठमेंअपनेचरणोंमेंमुझेजगहजरुरदेनामाधव !



मंगलवार, 6 मार्च 2012

इस जिन्दगी के दर्द के खिलाफ

तुम मुझे सदा अपनी ही तरह लगते हो ,
खामोशी से सब कुछ सहते -सहते
फर्क इतना हैं मेरा अंतस
जब फट पड़ता हैं असीम वेदना से
मेरे अश्क गिरते हैं ,
और तुम जब दर्द से लड़ते हो
तुम्हारे हाथो में धसे किलों से रक्त बहता हैं
तुम्हारे इस असीम दर्द को सहने की क्षमता ने ही
तुम्हे खुदा बना दिया
और में सह सका तुम्हारी तरह ,
तो कभी कृष्ण ,कभी राम और कभी इशु के रूप में
तुम्हारी बंदगी करने लगा
और मांगने लगा इस दर्द को सहने की असीम शक्ति
और जब -जब भी मे निराश था ,
मरने की कगार पे खड़ी थी
तुमने आके बड़े प्यार से अपना हाथ बड़ा के मुझे थाम लिया ,
सिखलाया अभी तुम्हे हारना नहीं लड़ना हैं
इस जिन्दगी के दर्द के खिलाफ
डरो नहीं सामना करो
में तुम्हारे साथ ,तुम्हरा हाथ थामे ,सदा ही खड़ा हूँ !
तुम तन्हा नहीं ,
मै
संग हूँ तुम्हारे ,
इस
दर्द के खिलाफ
मेरे मसीहा !
तुम्हारे
कदमो में तुम्हारी अनुभूति

सोमवार, 5 मार्च 2012

तुम्हारी प्रतीक्षा में अनवरत तुम्हारी अनुभूति





तेरे इन्तजारमेंपलकोंसेगिरतेयेमोती ,
मैंजानतीहूँ !
तुझेपसंदनहींइनआँखोंमे
फिरभीतुझसेबिनाडरेहीयेझलकपड़तेहैं
क्योकिइन्हेंपताहैंइसरास्तेपेतुमआनेकोहो
इसीलिएतोपलकेउनरास्तोंकोबुहारदियाकरतीहैं
औरयेआँखेउनरास्तोकोतुम्हारेलिएधोदियाकरतीहैं ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
माधव !
तुम्हारीप्रतीक्षामेंअनवरततुम्हारीअनुभूति

गुरुवार, 1 मार्च 2012

क्यों नहीं आते, माधव !




तुम्हारी  आहटें सुनने को तरते कान 
और पलकों के किनारे से गिरते ये मोती 
रूह की तड़प को बया  नहीं कर पाते 
सोचते हैं तुम कँहा होगे ?
केसे होगे ?
क्यों माधव क्यों ?
तुम्हारी इतनी प्रतीक्षा हैं इन श्वासों को 
तुम्हे देखे बिना ,
मिले बिना ,
जाने बिना ,
कैसा दिव्य रूप इस आत्मा में बस गया हैं 
जो पल -पल तुम्हारी आत्मा की
 विशालता का पता देता हैं 
सब कुछ जानकार भी व्याकुल हैं नयन
 तुम्हारी एक छबी देखने को 
एक बार तुम्हारे चरणों में करने को प्रणाम 
केसी दिव्य अनुभूतियाँ हैं ?
तुम्हारे इस असीम स्नेह सागर की 
तुम्हारा दिया स्नेह सागर तुम्हारी ही बाट जोहता हैं मधुसुदन !
क्यों नहीं आते माधव ! 
कोनसा अपराध मुझसे हुआ हैं जगदीश्वर !
जिसकी ये विरह सजा बना हैं 
प्रियतम !
तुम बिन क्यों मुझे यूँ  जीना पद रहा हैं 
सारे मन के बैर भुला हंस दो न कान्हा जी !
पलकों से डगर बुहारते हैं थकते नहीं नयन 
तुम्हारी पर्तीक्षा में बस पलकों के कोने भीगा करते हैं 
तुम बिन कोई नहीं हैं दूजा 
जो समझ सके आत्मा का  ये स्नेह अपार 
स्पन्दन हीन रिश्तों में तुम निराकार 
होकर भी साकार रूप धरे खड़े हो .
अपने एक हाथ से मेरा हाथ थामे खड़े कहते हो
" अनु , देख तेरे साथ तुझे थामे खड़ा हूँ ,
फिर मौन क्यूँ खड़े हो ,सुन रहे हो देख रहे 
और सदा की तरह बस परीक्षा ही लिए जा रहे हो 
आखिर कब तक नहीं आओगे माधव 
मेरे ये नयन तुम्हारी प्रतीक्षा में जड़ बन गए हैं 
चले आओ माधव !
अब चले भी आओ  ।
श्री चरणों में तुम्हारी अनुभूति