गुरुवार, 18 अगस्त 2011

मै ज़िंदा हूँ

आज हर तरफ जिन्दगी की सदा सुनाई देती है
मै ज़िंदा हूँ हर तरफ ये आवाज अपने ही अंतस से सुनाई देती हैं
तेरी बेवफाई में कही -कही खुदाई दिखाई देती हैं
किसी को कह के खुदा कोई दिल खुदा नहीं माना करता
खुदाई तो रूह में साफ़ दिखाई देती हैं
फर्क इतना हैं देखने वाले को पत्थर में भी खुदा दिखा करता हैं
बात ये तेरी मेरी रूह हैं की हैं तो रोक सके,
तो रोक ले मुझे मेरी हर सास में अपना खुदा दिखाई देता हैं |
रुहों पे कँहा किसी की हुकूमत हुयी हैं
जिन्दगी ने जब से जीना सिखा तेरी हर बात में खुदाई बसी हुयी देखि हैं
तेरे कदमो की इबादत के सिवा कँहा कोई इबादत मेने सीखी
में तो वो हूँ जेसा तुझे देखा जाना ,तुझसे ही ये इबादत सीखी
मेरी जिन्दगी हैं तेरी इबादत में ही आबाद
मेने कँहा दूसरी कुरान की कोई आयत सीखी
तेरी
कड़वाहट भी शहद से मीठी फर्क इतना हैं
तुमने कभी इस मीठास को चखा ही नहीं
तुझे क्या पता इस कडवाहट में भी
तेरी पाकीजा रूह का अक्स मेरे नाम से झलकता हैं |
अनुभूति

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