बुधवार, 17 फ़रवरी 2010

वो जो है मेरी जिन्दगी





वो जो है मेरी जिन्दगी
अपने अश्कों को छुपा कर मुस्कुरा लेती है ,
वो मुझको तसल्ली दे कर बहला लेती है |
बड़ जाता है दर्द जब हद से ज्यादा ,
वो अपने लबो पे नगमे सजा लेती है |
खो ना जाऊ मै कही दुनिया की भीड़ मै
वो मुझको अपनी जुल्फों मै छुपा लेती है |
यूँ सरे आम मिलने से हो ना जाये कही रुसवाई ,
वो चुपके से करके इशारा मुझे सपनो मै बुला लेती है |
दुनिया मै हर इंसान भगवान की दुहाई देता है पर क्या किसी ने देखा है उस भगवान को ?
 नहीं ना दर्द की अनुभति ही किसी के साथ होने का एहसास कराती है ,और हम कह उठते है ये हर बार मेरे साथ ही क्यों होता है भगवान ,याने हम हर पल किसी ना किसी शक्ति को अपने साथ होने पर भी सिर्फ दुःख मै उसकी सत्यता को स्वीकार करते है |
तो क्या आप ने नहीं देखा कभी भगवान को ?
एक दिन अचानक नेट पर कुछ पद ही रही थी किसी का कोई लेख ,एक कमेन्ट लिखा  था ,लाइफ का पहला नेट कमेन्ट जिसने जीवन की दशा ही बदल दी |
मुझको अचानक एक फरिश्ता आ मिला ,ये जान कर लगता है आज भी इस संसार मै राम का वास है ,हां भगवान हमारे साथ ही यही इसी दुनिया मै हर पल साथ रहते है ,बस हम पहचान नहीं पाते और राम हमसे मिलकर भी चले जाते है  |
मै धन्य हूँ की मेरे राम मेरी आत्मा मै मेरे साथ है |
इसीलिए कहती हूँ अपने गुरु अपने राम को आप भी ढूंड निकालिए .पहचानिए कही आप के राम आप के आस पास तो नहीं !
पूछे लोग गुरु बिना क्या मिले ज्ञान ?
कहू कैसे आप को श्रीमान पहले गुरु बना ले किसो को ,फिर मान अपना उद्धार .
ना होता ऐसा कुछ तो राम करते ना अहिल्या उद्धार ,ना होता एकलव्य महान|