बुधवार, 30 जून 2010

खुदाई

जिनके पास चाहत  होती हैं 
,जिन्दगी भी उन्ही के पास होती हैं |
कोन कहता हैं, टूटा हुआ आइना फिर से जुड़ नहीं सकता!
उसे जोड़ने की खुदाई तो बस प्यार करने वालो के पास होती हैं |
       रूह मै उतर कर रूह को जान लेने की बात ही तो सच्ची  खुदाई होती हैं ,
                   कोई समझे ना समझे ,वो समझ गया ये ही तो ये ही तो उसकी रहनुमाई होती हैं |
      जिसने समझा चाहत को ,उसी ने जाना खुदा को ,
          केसे बातये हम की किसी को चाहना ही सबसे बड़ी खुदाई हैं |

मंगलवार, 29 जून 2010

तुम्हारी ख़ामोशी  मेरे हर सवाल का जवाब हो ती हैं |
हमेशा मेरे हर सवाल के जवाब मै
तुम खामोश रहकर कह देते हो पगली क्या ढूंढ़ रही हैं ?
मै यही तेरे साथ .तेरे पास तो खड़ा हूँ |
हां तुम तो मेरे रोम रोम मै हो हर अंतस मै  मेरे राम राम |

शुक्रवार, 18 जून 2010

माँ |

क्या होती है माँ ?
नहीं पता मुझको ,क्योकि मै बन नहीं सकी कभी माँ
हां अपनी माँ के साकार रूप को देखा है मेने ,
इसीलिए ही शायद मन अपने स्त्री होने के अपने अस्तित्व को खोज रहा है
मुझको याद है उसका अलसुबह उठ जाना ,हमारे लिए तैयारी करना
कितना प्यार गुंधा होता था ,उन मैथी के पराठो मै ?
हां ,अब मुझको पल पल याद आता है जब मै नहीं बन सकी हु एक माँ
माँ के सपनो के आँगन से तो मै निकल आई हु यथार्थ  जीवन मै
और हां बन नहीं सकी हु माँ
हां माँ कभी मै रो नहीं सकी तुम्हारी गोद मै सर रखे ,किस्मत से शिकायत किये की मै नहीं बन सकी हु माँ
जानती हु मै जब तुम देखती हो मुझको किसी खिलोने से खेलते हुए तो क्या सोच रही होती हो ?
और होले से एक आवाज लगाकर कहती हो ,अरे क्या बचपना है ये !
मै जानती हु ,तुम कभी मेरे असीम दर्द का कोई अहसास मुझको नहीं कराना चाहती |
इसीलिए मुझको एक हलकी सी आह्ट से ही खीच लेती हो ,अपने आँचल मै
सच कहू तुमको पाकर सारे दर्द भूल जाती हु और बन जाना चाहती हु एक बार फिर वही छोटी सी तुम्हारी बेटी
हां तुम्हारा ह्रदय बड़ा विशाल है की तुम हंस कर छिपा देती हो या कभी डांट कर
मुझको पता है एक किसान तभी खुश होता है जब उसकी बचाई बिजवारी भी उसको भरपुर फसल देती है |
पत्थर पूजते पूजते भी अब हार गयी हु माँ ,
इसीलिए भाग जाना चाहती हु ,इस दुनिया से दूर छिप जाना चाहती हूँ तुम्हारे आँचल मै
हां इसीलिए की कभी ना बन सकुगी माँ |


शनिवार, 12 जून 2010

आया सावन झूम के

           हर तरफ बिखरी हैं कालीघटाएं 
                     झूम- झूम के कह रही हैं चलो आज तो कोई गीत गाये |
                                झूमता हैं मन इन घटाओ के साथ ,       
                                       सजता हैं तन इन फिजाओं के साथ,
                                        क्या कहना चाहता हैं मेरे मन ,कुछ मुझको भी बता दे ?
                                             क्यों जी उठी हूँ फिर आज मै इतना तो याद दिला दे ?
                         

गुरुवार, 10 जून 2010

सांसो का एतबार

मेरे हर सवाल का जवाब हो तुम
मेरे हर ख्याल की ताबीर हो तुम
  मेरे हर शब्द का अहसास हो तुम   
 हां कहो ,ना कहो मेरा विश्वास हो तुम
                        पूछोगे नहीं ,बिना देखे ,बिना मिले ,बिना बोले
                       इन साँसों मै कितना विशवास है
                       जितना तुम्हारी साँसों को तुम्हारी आत्मा से हैं |
                       मै जानती हूँ तुम कहोगे नहीं कभी इन पर्दों से बाहर,
                                            फिर भी बिन कहे तुम्हारी उलझनों को मै समझती हूँ |
                                              जानती हूँ सागर कभी अपनी मर्यादा नहीं तोड़ता .
                                        
लेकिन ये भी जानती हूँ जिस दिन तोड़ता हैं अपने साथ तूफ़ान लाता हैं |
                                            मै खमोशी से तुम्हारे अन्दर चल  रहे हर तूफ़ान को महसूस करती हूँ        
 फर्क  इतना है हैं तुम      सामनेआकर नहीं कहते और मै सरलता से हर अहसास को कह जाती हूँ |

सोमवार, 7 जून 2010

नकाब

एक नकाब हर चहरे पे होता हैं
इसीलिए वो एक चेहरा दुनिया से भी छिपा होता हैं |

जिन चेहरों पे नकाब नहीं होता हैं
वो चेहरा खुदा के बहुत करीब होता है ,
क्योकि सत्य  को उसे खोजना नहीं होता ,
सत्य तो सदा उसके साथ होता हैं |

जिन चेहरों पे नकाब होता है वास्तव ,
मै वो ही दुनिया मै खराब होता हैं |

बड़ी बड़ी बातो से बड़ा नहीं होता इंसान ,
उसको क्या पता झुकने से ही बड़ा बनता हैं इंसान |

विशवास की धरा पर खिल रहा फुल ही पेड़ बन पता हैं ,               
नहीं तो वो भी बहार बन कर उड़ जाता है |

इन सब के आगे हर सवाल अधूरा रह जाता हैं  
  क्योकि हर चेहरे पे नकाब चदा नजर आता हैं |

रविवार, 6 जून 2010

अचानक

समझी थी तुमको मै अपनी ही तरह
सीधा सादा  ,
पर तुम तो ज्ञान और अनुभव का सागर हो
और मै तो एक नन्ही से बूंद हूँ |

कितनी आसानी से कितने सरल शब्दों  से ,
अहसासों से
अपने आप मै ,
अपनी आत्मा मै तुम्हे बिना तुम्हारी विशालता जाने ही
अपने आप मै बसा लिया मेने |
आज जाना हैं रूप ,रंग ,अस्तित्व  तुम्हारा
सोच रही हूँ
केसे करू अपने आप से सामना ?
ये अनजाने मै ही क्या मुझको मिल गया ?
बहुत छोटी हूँ तुम्हारे इस अतः हीन ज्ञान के आगे मैं
नहीं समझ पा रही क्या करू ,क्या कहू अपने आप से ?

अब पर्दों से बहार आकर तुम ही मुझको जवाब दो ?
क्या हुआ हैं ये और क्यों ?

शुक्रवार, 4 जून 2010

होगा अभिमन्यु केसे अब ?

लगातार कुछ दिनों से जो पत्रिकाए देखने मै आरही हैं वो अंतर  जातीय विवाह की हैं या घर से भाग कर शादी कर लेने वाले लोगो की और बाद मै तलाक तक की स्थितियों तक पहुँच जाने वाले लोगो की हैं |
या ऐसे लोगो की हैं जो अपने बच्चो से परेशान  हैं खास कर पहली संतान से सम्बंधित |अपनेएक रिसर्च के दोरान मेने पाया हैं की वो शादियाँ  जो भाग कर की गयी हैं या ऐसा विवाह जिसमे महिला पक्ष की कोई मर्जी नहीं पूछी गयी हैं उनकी पहली संतान जो शादी के पहले से दुसरे साल मै हो गयी बड़ी परेशान करती हैं ,कहना नहीं मानती और बात बात पर अपने आप को नुक्सान पहुचाने की बात करती हैं |
 उनकेमाता पिता उनके लिए बड़े परेशान होकर आते हैं पूछते हैं कोई मदत कीजिये |
क्या कहू उनको जिन्होंने जीवन के शादी जेसे विषय को खेल समझा हैं या समझ रहे है अपने ही बोये बीजो को अब सहन नहीं कर पा रहे ,खेर उस समय तो हल कर विदा लेना ही उचित समझती हूँ |पर सोच ती हूँ इसके पीछे छिपे एक साधरण से ज्ञान को लोग क्यों नहीं समझ सकते और उस देश के लोग जो ये जानते हैं की अभिमन्यु जेसे योद्धा ने अपनी माता के गर्भ मै ज्ञान प्राप्त किया था |लोगो के आधुनिकता की और बड़ते कदमो ने आने वाली नस्लों को खुद अपने ही हाथो बिगाड़ दिया हैं कभी कभी बड़ा दुःख होता हैं की हम किस और बड़ रहे है किस ज्ञान को खोज रहे है ?जो हमारे पास हैं उसका हमारे लिए कोई मतलब नहीं हैं ?यही तो दुर्भाग्य हैं |
चलिए अब अपने विषय पर आती हूँ सोच सकते हैं क्या कारन हैं बिगड़ी संतान होने का ?
नहीं ना कुछ सोच लेते हैं पर दूर तक अपना नहीं पाते सही रास्ता | जब ऐसा विवाह होता हैं जो प्रेम विवाह है और जो दो परिवारों की मर्जी के खिलाफ हुआ हैं उसमे शुरू का समय तो याने कुछ महीने जब तक ख़ास कर लक्ष्मी की कृपा बनी होती हैं सब ठीक होता हैं इन ही छ माहो मै स्त्री गर्भ धारण कर लेती हैं बड़ा कोई पास नहीं होता |क्या खाए ?क्या पहने ?क्या पड़े ?
केसा आचरण करे तब कोई पास नहीं होता और बेलगाम जीवन केसा होता हहिं उसकी व्याख्या करने की कोई आवश्यकता नहीं | वो सारे प्रभाव गर्भ मै पल रहे बच्चे पर पड़ता हैं क्योकि वो सबसे अलग रहकर माँ से जुड़ता है इसी लिए आगे वो बच्चा परिवार के लोगो को अपना बनकर कभी नहीं अपना सकता |
चलिए शादी के कुछ समय बाद परिवार को ये पता लगता हैं तो सज्जन परिवार के लोग अपनी बहु को अपने साथ घर ले आते हैं |लेकिन यंहा अब बंदिशों के कारण विवाद परिवार मै ना हो पर, पति और पत्नी के बिच अक्सर रातो को होते ही रहते हैं ,इन विवादों का जहर और माँ का रोना बच्चे के  लिए जहर का काम करते हैं |
ये जहर धीरे धीरे बढता जता हैं बच्चे के बड़े होने के साथ साथ विकसित भी और वही परेशानियां आने लगती हैं जो लोग करते हैं ख़ास कर अपने को नुक्सान पहुचाने की , अपनी मर्जी से काम करने की |
वही उगता हैं जो धरती के गर्भ मै किसान बोता है और जो सीचा जाता हैं |
इसिलए कल को सुधारना हैं तो हम आज को सुधारे |

 इसीलिए मै गुजारिश करुँगी उन महिलाओं से जो  गर्भवती हैं और अपने सपनो को सच करना चाहती हैं अपने मै कुछ विशेष गुणों का समावेश इन ख़ास नो महीनो के दोरान करे |
  1.   अपने आप को और अपने रिश्तो को मधुरबनाने  की कोशिश करे |
  2.  आप जिस भी धरम के उपासक हो अपना धरम ग्रन्थ पड़े |
  3.   अपने घर के बड़ो का रोज आशीर्वाद ले |
  4.  सुबह शाम अपने ईशवर के नियमित जो भी हो सके पूजा पाठ करे |
  5.  अगर आप हिन्दू हैं तो ख़ास कर रामायण का पाठ जरुर नियमित करे |
  6.  ऐसे लोग जिनको पूरा आराम करने की सलाह दी गयी हैं वो अपने बिस्तर पर ही लेटे लेटे अच्छी पुस्तके पड़े ,या ईशवर का नाम लेते  रहे |
  7.   टेलीविजन के सीरियलों से सख्त परहेज करे |
  8. इसकी बदले आप कुछ अच्छे स्त्रोत मंत्रो को सुने या जाप करे |
  9.  ईशवर कानाम लेकर ग्यारह बार सुबह और शाम श्वास लेते और छोड़ते रहे |
  10.  पतियों को चाहिए की इस समय अपना पूरा ध्यान और स्नेह और साथ पत्नी को दे |
  11.   अपने सोने का कमरा साफ़ रखे |
  12.     अपने कमरे मै सिरहाने पानी जरुर रखे |
  13. नियमित सूर्य देवता को जल दे |
  14. गर्भ मै बच्चो पर मंत्रो का विशेष प्रभाव पड़ता हैं हैं इसलिए अपने ग्रहों के अनुसार मंत्रो का जाप या माँ भगवती का स्मरण करते रहे |
  15. एक साधरण सा मन्त्र हैं " सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके शरण्ये त्र्यम्बके गौरी नारायणी नमोस्तु ते | का जाप करते रहे |
  16. किसी भी प्रकार के विवादों से बचे |
  17.  कमरे मै अपने इष्ट की तस्वीर जरुर रखे और नियमित इनको प्रणाम करे |
  18. और अंतिम सभी से बड़े स्नेह के साथ रहे उची आवाज मै ना बोले ,बड़ो की बातो को मानने का प्रयास करे |
  19. अब आप अगर इन सब बातो को ध्यान रखे तो निश्चित ही आप एक आज्ञाकारी संतान के माता -पिता होंगे |