रविवार, 7 जुलाई 2013

हूँ तुम्हारी ही कृष्णा !

मेरे कृष्णा !
तुम जो होठो पे धर लो
तो हूँ मैं
रागिनी तुम्हारी ...
तुम जो रंग लो
सिंदूरी रंग में तो
हूँ मैं 
अनुरंजनी तुम्हारी ....
तुम जो बिन कहे भी
निभा लो मुझे
तो हूँ मैं
 परिणीता
तुम्हारी कृष्णा !
श्री चरणों में अनुभूति

8 टिप्‍पणियां:

सरिता भाटिया ने कहा…

आपकी इस प्रस्तुति की चर्चा कल सोमवार [08.07.2013]
चर्चामंच 1300 पर
कृपया पधार कर अनुग्रहित करें
सादर
सरिता भाटिया

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत सुंदर रचना
बहुत सुंदर

poonam ने कहा…

bhetreen

संजय भास्‍कर ने कहा…

bilkul sahi .......एक दम दिल से निकली बेहतरीन रचना

Aziz Jaunpuri ने कहा…

बहुत सुंदर

रचना दीक्षित ने कहा…

समपर्पण का ऐसा भाव सदा बना रहे. शुभकामनाएँ.

आशा जोगळेकर ने कहा…

सुंदर ।

Laxmi Kant Sharma ने कहा…

बहुत ही सुंदर रचना..भाव विभोरित