शुक्रवार, 5 जुलाई 2013

श्री कृष्ण परिणीता अनुभूति

मेरे  प्रियतम !
मेरा खाब तुम ही थे 
ख्यालो में इसलिए तुम चले आये 
मेने तुम्हे सदा 
अपनी आत्मा से पुकारा 
इसलिए तुम चले आये 
बन के मेरे माधव !
और मैं बिन परिणय के भी बन गयी हूँ 
तुम्हारी 
श्री कृष्ण परिणीता अनुभूति

1 टिप्पणी:

राजेंद्र कुमार ने कहा…

बहुत ही सुन्दर और सार्थक प्रस्तुती,अभार।