रविवार, 28 अप्रैल 2013

तुम्हारी ही परिणीता

                               
मेरे माधव !
पग में घुँघर मेने बांधे तुम्हारे नाम के
जो बंधनी में तुम्हारी कहलाई
एक जनम की कीजिए बात
पर में हर क्षण पल तुम्हे ही पुकारूँ
पीया ,,,माधव माधव माधव कहते
तुम्हारी ही परिणीता कहलाऊं ......श्री चरणों में अनुभूति

3 टिप्‍पणियां:

yashoda agrawal ने कहा…

शुभ प्रभात..
जय श्री राधे....

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

बढिया

राधे राधे

सरिता भाटिया ने कहा…

नमस्कार
आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (29-04-2013) के चर्चा मंच अपनी प्रतिक्रिया के लिए पधारें
सूचनार्थ