गुरुवार, 12 अप्रैल 2012

मै नहीं देखा करती सितारों को ,


आसमान में मेने जब भी देखा हैं .
चमकते सिंदूरी सूरज को ही देखा 
मै नहीं देखा करती सितारों को ,
 वो तो वैसे भी हजार हुआ करते हैं
सितारे हर मोड पे मुझे मिल जाया करते हैं 
लेकिन मुझे तो मोहब्बत  उसी सिंदूरी सूरज से हैं 
जो इस दुनिया में सिर्फ एक  ही हैं 
हां वो एक जिसकी रौशनी में खुदा के बंदे ही जिया करते हैं .....................
हां में नहीं देखा करती सितारों को 
क्योकि वो हजार हुआ करते हैं ,,,
मुझे मिटना ,मरना ,जल जाना मंजूर हैं 
उसी सिंदूरी सूरज की रौशनी में मोहब्बत में ..............
हां इसीलिए में नहीं देखा करती सितारों को 
श्री चरणों में अनुभूति