रविवार, 22 जुलाई 2012

देखो ,कृष्णा ! अब तो बाज आओ



 ओ मुरलीधर !
मेरे चित्त चोर !
मनबसिया !
देखो जी !
अब धर भी लो अधरों पे अपने ,ये बाँसुरिया 
नहीं तो ,अब मैं तोहे अब नहीं मनाऊंगी  
काहे की ऐसी जिद ,
मुरली बजा के मुझे तुम  बुलाओ 
पहले तो मोहे सताओ 
डराओ ,उल्हाना दो 
और जब मैं  आऊं  पास तोरे रूठ के बैठ जाओ 
और मुझे ही ये रूठा मुख दिखाओ 
मुझे से तो भले दुनिया वाले 
ओ उन्हें अपनी ये मुरलिया तुम सुनाओ 
देखो माधव !
ये ठीक नहीं ,पल भर में अपने इतने रूप दिखाओ 
में सीधी सादी जानू न तोरे जितनी बतिया सारी 
काहे तुम सीधो को इतना सताओ 
देखो ,कृष्णा 
अब तो बाज आओ 
मान भी जाओ 
अब रख अधरों पे मुरलिया 
कोई स्नेह की धुन सुनाओ 
..............................................श्री चरणों में अनुभूति