शनिवार, 30 जून 2012

ये कैसा हैं रिश्ता ! मेरी आँखों से इन अश्को का|







ये कैसा हैं रिश्ता !
 मेरी आँखों से इन  अश्को का
दुनिया मुझे खफा हो भी जाए ,
तो भी ये जालिम साथ निभाते हैं जिंदगी का |
मैं इनके बिना जीने की सोचूं 
तो भी कभी हालते जिंदगी ,
ऐसे हँसी खाब दिखा के खुशी से
मेरी आँखों में लाती हैं ,
तो कभी इन्ही खाबो के टूटने का मातम मनाती हैं |
ये कैसा हैं रिश्ता!
 मेरी आँखों से इन  अश्को का|
अनुभूति 

9 टिप्‍पणियां:

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
--
इस प्रविष्टी की चर्चा कल रविवार (01-07-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
सूचनार्थ!

काजल कुमार Kajal Kumar ने कहा…

☺ वाह जी सुंदर

expression ने कहा…

बहुत सुन्दर....कोमल अभिव्यक्ति.....

अनु

महेन्द्र श्रीवास्तव ने कहा…

सुंदर रचना
क्या कहने

Reena Maurya ने कहा…

कोमल भाव लिए..
सुन्दर अभिव्यक्ति...
:-)

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूब ... सुंदर अभिव्यक्ति

रचना दीक्षित ने कहा…

ये रिश्ता तो कम से कम टा उम्र चलता है.

बहुत सुंदर प्रस्तुति.

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

बहुत खूब.....

Point ने कहा…

gahare ehsas