शुक्रवार, 8 जून 2012

में जन्मो से तुम्हारी हूँ !





मेरे माधव !
दुनिया में उन बहुत कम लोगो में से हूँ 
जिन्होंने तेरे चरणों का आशीष पाया हैं 
तुझे अपना मान ये कुमकुम 
अपने मस्तक पे सजाया हैं ,
मेरी हाथो की ये बसंती कंगना  और
 ये मस्तक पे चमकती कुमकुम की रेखा
 मुझे पल -पल ये अहसास दिलाती हैं की मेरे राम ! 
में जन्मो से तुम्हारी हूँ 
चाहे में कहूँ राम चाहे माधव 
हर  श्वास बंधनी तुम्हारी हूँ 
मेरा जीवन तुम्हे अर्पण मेरे आराध्य !
मेरे श्याम !
मेरे माधव !
श्री चरणों में तुम्हारी अनुभूति  

1 टिप्पणी:

संजय भास्कर ने कहा…

प्रशंसनीय रचना - बधाई
नई पोस्ट सदा की अर्पिता पर आपका स्वगत है