मंगलवार, 5 जून 2012

ले लो,मेरे प्राण ,एक भेट समझ स्वीकार





 ऐ जिन्दगी !
मुझे तुझसे मोहब्बत हैं .
कुछ लम्हा ,कुछ दिन और मुझे जी लेने दे
अपने माधव  की पन्हाओं में 
ये एक खाब हैं 
टूट न जाए , 
मेरी सांसो की लडिया 
मेरे माधव !
तेरे कदमो में आने से पहले 
में हर घडी अब जिन्दगी से 
अपना दामन फैला के ये ही दुआ माँगा करती हूँ !
मेरी जिन्दगी का गुजरता हर लम्हा मेरी हर सांस पे भारी है 
एक तरफ तो तेरे कदमो में आने की आरजू 
और दूजे पल ये जिन्दगी के सितम मुझपे भारी हैं 
विद्रोह कर बैठी हैं लाचार जिन्दगी अब 
हां ,सरिता तोड़ चुकी हैं सारे बाँध 
रूह का पंछी हैं 
श्याम !
बस तेरे बैकुंठ ,
तेरे चरणों को चूमने को बेताब ,
हां पग पखारना चाहती हैं सरिता अपने सागर के स्वामी 
तुम्हारे ,मेरे जगदीश्वर !
मेरा मोक्ष तेरी हैं चरण सेवा 
बस मेरी ये साँसे लड़ ले अपनी मौत से 
ये दुआ करना मेरे मालिक 
हालत ऐ जिन्दगी फिर भी तेरी भक्ति ,तेरे अक्ष्णु विशवास 
के सहारे अंतस से खिलती हैं 
लेकिन भोतिक रूह दम तोड़ रही हैं 
मेरी शिराए फट रही हैं 
लगता हैं ये जिस्म तोड़ के मेरी रूह 
तेरे कदमो से  लिपटने को बेताब हैं 
केसे कहूँ माधव ?
किसे समझाऊं हालते जिन्दगी 
बस तेरी ही बाहों में आके मरने को बेताब हूँ 
हां सरिता अपने सागर में खोने अपना अस्तित्व अंतिम श्वासे ही गिन रही हैं 
हे प्रभु ! 
मेरे भोले नाथ !
 इन श्वाओ की बस तब तक तुम रख लो लाज .................
श्री चरणों में अनुभूति बैठी हैं ले आज एक करुण पुकार साकर छबी धरो माधव आज 
नहीं तो ले लो मेरे प्राण ,एक भेट समझ स्वीकार 
अनुभूति
 

1 टिप्पणी:

kunwarji's ने कहा…

अद्भुत...

कुँवर जी,