सोमवार, 21 मई 2012




हे मधुसुदन !
मौत भी मेरी मुस्कुराहठो को देख के 
मुस्कुराके लौट जायेगी 
जाने हैं क्यों ?
मेरे मुरलीमनोहर !
क्योकि वो जान लेगी की 
इन मुस्कुराहटों में तुम मुस्काते हो ......
श्री चरणों में मुस्काती हुयी अनुभूति

3 टिप्‍पणियां:

Girish Billore ने कहा…

Welcome Back

Girish Billore ने कहा…

वाह बहुत खूब

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

वाह...!
बहुत सुन्दर प्रस्तुति!