शनिवार, 21 अप्रैल 2012

तेरी प्रीत अनोखी

मेरे माधव !
तेरी प्रीत अनोखी 
मेरी आखियों से अमृत बन बहती जाए 
केसा हैं अनुपम स्नेह तेरा 
ये दीवानी मीरा 
संसार भूली जाए 
क्यों मानू कोई रिश्ता में इस दुनिया से 
मेरी आत्मा ,मेरी प्रीत 
मेरा स्नेह तुम हां तुम ही  तो हो मधुसुदन 
मर जाउंगी में एक दिन 
जो तुम नहीं लेने आये मोहे 
तुम्हे यूँ ही पुकारते ,पुकारते 
मेरे माधव मेरी आत्मा
तेरी हैं हैं तुझे ही अब ये समर्पित हैं जीवन 
               श्री चरणों में तुम्हारी अनुभूति

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