मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

जो थामो तुम ये हाथ

मेरे माधव !
लाज से में मर ही नजाऊं ,
जो थामो तुम ये हाथ 
मेरे मुरली मनोहर !
मै  तो तेरी मुरली की धुन से ही 
अपनी सुध बुध गवाऊं .
में दीवानी पग पायल पहन 
आत्मा के इस आनंद मिलन पे
सुख का नीर बहाऊ,
कुछ  और नहीं बचा जो 
में अब न कहने को जो में कह जाऊं
श्री चरणों में अनुभूति

कोई टिप्पणी नहीं: