मंगलवार, 10 अप्रैल 2012

मेघ मल्हार





ओ मेरे प्रियतम ,
मेरे माधव !
गूंज उठा हैं सुनकर तुम्हारी धडकती साँसों की सरगम 
मेरी सांसो में मेघ मल्हार 
केसा स्नेह हैं ये प्रियतम 
जो तुम्हारे बिना बोले भी घटा बन के बरसता हैं 
मेरे रोम -रोम को महकाता हैं 
मेरी पायलो के सुरों को नयी उमंग सेसजाता हैं
उमड़ पड़े हैं आज आसमान पे आज 
ये काले -काले मेघ
आज तुम्हारे सुरों से 
हां माधव ,
मेरे मुरली मनोहर !
तुम्हारी सांसो की मुरली से 
ही तो धड़कता हैं मेरा जीवन 
हां झूम उठा हैं वसंत और फाग एक साथ 
केसे कहूँ माधव !
क्या हैं तुम्हारी धड़कन और तुम्हरा जीवन मेरे लिए 
मेरी साँसे, मेरे प्राण , मेरा चिंतन 
मेरी भक्ति ,मेरा सम्मान 
सभी कुछ तुम हो तो माधव 
मेरे मन के प्रियतम 
श्री चरणों में अनुभूति

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