बुधवार, 4 अप्रैल 2012

मोगरे के फुल तुम्हारे कदमो के लिए





   मेरे माधव !
मै आज चुन लायी हूँ
भीनी -भीनी खुशबु से भरे मोगरे के फुल
 तुम्हारे कदमो के लिए .........
मेरे पास तुम्हारे अनन्य अनुराग के
बदले और कुछ नहीं हैं
प्रियतम !
भटकती एक नदी को अंतिम
सागर देने वाले भी तुम ही तो हो ,कृष्णा
मुझे बस प्रतीक्षा हैं
तुम्हारे मेरे बीच की उस तपस्या  की
जो तुम्हारी आँखों में
मेरी प्रतीक्षा बन खड़ा हैं
और मेरी साँसों में जिंदगी बन चल रहा हैं ,,,,,,,,,,
तुम पत्थर की उस मूरत से भी मुझसे इतना बतियाते हो
मेरी आँखों में अपनी खामोश जुबा से ना जाने कितने खाब बुन जाते हो
मेरी प्रीत ही मेरी श्रद्धा हैं
पूजा हैं ,तपस्या हैं माधव
और कुछ नहीं हैं मेरे पास तुम्हे देने को
हां इसीलिए मै चुन लायी हूँ
भीनी -भीनी खुशबु से महकते
 मोगरे के फुल तुम्हारे कदमो के लिए ,,,,,,,,,,,,,,,,,,
            श्री  चरणों में तुम्हारी मुस्कुराती हुयी अनुभूति

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