मंगलवार, 27 मार्च 2012

आओ न श्याम ,









मेरे माधव !
मधुवन से आती ये महकती फिजायें 
आज तुम्हे पुकार रही हैं  
कभी तो चले आओ न श्याम 
कभी तो मेरे लिए 
इन तरसती आँखों के लिए साकार अभिव्यक्ति धरो ...
विदीर्ण हैं मन का आँगन 
लकिन मधुबन से आती ये मोगरे की भीनी -भीनी 
खुशबु होश उडाती -उडाती तोहे पुकार रही आज 
कभी तो अपने अधरों पे मेरे लिए भी मुरली धरो न 
तरस हें आत्मा मेरी आज 
तोरी सुनने को मुरलिया 
आओ न श्याम ,
आओ न ;;;;;;;;;;;;;;;;;
श्री चरणों में अनुभूति
 


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