मंगलवार, 13 मार्च 2012

तुम उस पत्थर की मूरत में हो ठीक हो






मेरेमाधव !
तुमबहुतभलेहो
जोसिर्फमेरेअहसासोंऔरकल्पनाओंकेसागरमेंबसेहो
अगरतुमइसदुनियाकेलोगोकीतरहबनके
इसजमीपेआओगे
तोकभीनहींआना ,कभीनहीं
तुमउसपत्थरकीमूरतमेंहोठीकहो
जोसदाएकसीरहतीहैं
बदलतीनहीं
आईनेकीतरहसाफ़ ,
जिसमेअपनाअंतसहरकोईदेखसकताहैं
मुझेअबदुःखनहींकीतुमसाकारबनके
अपनेकदमोसेमुझेउठानेनहींआये
अगरतुमइसदुनियाकेलोगोकीतरहबनके
चलेआते ,तोशायद
मेंतुमसेभीकहीनफरतकरबैठती
लेकिनअच्छाहैंतुमकभी -नहींआये |
तुम्हेमेरीसोगंध
तुमइसदुनियामेंइन्सानबनकेकभीआना
जँहाबसेउन्हीसांसोसेअह्साओंसेअपनी
साचीप्रीतनिभाना |
मेंएकदिनहारकरतेरेकदमोमेंचलीआउंगी
लेकिनतुमइसदुनियामेंकभीनहींआना ,
कभीनहींमाधव !
कभीनहीं !
तुम्हारेचरणोंमेंतुम्हारीअनुभूतियुही
रोते -रोतेमरनामुझेस्वीकारहैं
लेकिनइनचरणोंसेउठानेतुम ,
इसदुनियाकेइंसानोंमेंनहींआना
नहींआना |
तुम्हारीहैंबसयेअनुभूति
संसारमेंनहींतुम्हारबैकुंठमेंअपनेचरणोंमेंमुझेजगहजरुरदेनामाधव !



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