सोमवार, 5 मार्च 2012

तुम्हारी प्रतीक्षा में अनवरत तुम्हारी अनुभूति





तेरे इन्तजारमेंपलकोंसेगिरतेयेमोती ,
मैंजानतीहूँ !
तुझेपसंदनहींइनआँखोंमे
फिरभीतुझसेबिनाडरेहीयेझलकपड़तेहैं
क्योकिइन्हेंपताहैंइसरास्तेपेतुमआनेकोहो
इसीलिएतोपलकेउनरास्तोंकोबुहारदियाकरतीहैं
औरयेआँखेउनरास्तोकोतुम्हारेलिएधोदियाकरतीहैं ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
माधव !
तुम्हारीप्रतीक्षामेंअनवरततुम्हारीअनुभूति

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