रविवार, 19 फ़रवरी 2012

मेरे माधव ! बंधिनी हूँ तुम्हारी ,





 मेरे माधव !
बंधिनी हूँ तुम्हारी ,
बाँध सका कोई भौतिक बंधन ,
तुमनेअपने होठो की मुरली की धुन मे
ऐसा मुझको बांधा|
छुठा मुझसे
इस संसार के झूटे  सुख और मोह माया का नाता
दिन हो या  रात मुख पे मेरे तेरा नाम  ,
क्यों तोहे पुकारने की आदत पड़ी हैं 
लेकर कृष्णा, माधव तेरा नाम
बस कभी माधव बन के तू आ जाये सामने
तो कभी बन जाए मेरा राम !
नहीं समझ आया जीवन का ये अद्भुत सुख
संग विरह मे भी मुस्कराहट ,
बड़ेअजीबअजीब रंगदिखलाए
मुझे को तेरी ये चाहत
फूटा रूह का सागर
पाकर तेरे चरण कमलो की धुल
जो पा जाती में चरणों का स्पर्श
तो कीस असीम सुख को  मे पाती,
बस ये सब केसे अपने इन तुच्छ शब्दों में तुझ को बताती
ये कुम्हला फुल तेरे चरणों में कभी चड पायेगा
इसीलिएकहतीहूँ
इसचरणधूलिसे ,
इस पगली का जीवन धन्य हो जाएगा !
बन दासी ,बनी हूँ बंधिनी प़ियाकी
जानूजिसने स्नेह किया हो मधुसुदन
हां मिटना ही हैंउसकाजीवन
माधव स्नेह में जो बीते जीवन
फिर मिटकर भी उपवन बन जाएगा जीवन |

श्रीचरणोंमेंअनुभूति

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