शुक्रवार, 24 फ़रवरी 2012

हम को कृतार्थ करो !





मेरे मुरलीधर !
गोविन्द ,
गोपाल 
तेरी करू में लाखो बार पुकार 
तेरे अधरों की मरुली बिन सूना पडा हैं 
मेरा संसार 
मेरे श्याम ! 
किन युद्धों में घिरे हो 
या सच में अपनी राधा से रूठे हो .....
तुम रूठो तो रूठ भी जाऊं 
 में हर बार पडके  तोहरे चरण कमल ,
में मनाती जाऊं 
तू ही बता जो लगन तुने लगाई 
अब उसके बिन केसे जी जाऊं ?
बहती हवा तेरे चारो ही बहती जाएँ 
मुझे ये पगली अपने नाम से पुकारे जाए कहे 
तुझसी ही मे हूँ 
हां  विरले  ही कोई मोह मुझे बाँध पाया 
अब समझ तेरी भक्ति का संसार आया 
दे असीम सुख का ये अमृत 
मेरे माधव !
कँहा खो गए तुम 
पुकारो सुनो ,मेरी गिरधर !
जो हो गलती कोई मुझे क्षमा दान दो 
अब न सताओ 
साकार छबी दे अब ये स्नेह स्वीकार करो 
हां मुरली धर 
इस अधरों की मुरली की धुन से 
हम को कृतार्थ करो 
कृतार्थ करो...
 कृतार्थ करो  .........
श्री चरणों में अनुभूति का ये केसरी वंदन स्वीकार करो ...... 
   
 

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