मंगलवार, 21 फ़रवरी 2012

हमदर्दी

मेरे खुदा !
दावे थे जिनके,
हम उमर भर साथ निभायंगे ,
वो आज गैरों की बाहों में बाहें डाले नजरआतेहैं ,
हमें बेदर्द कहके दुसरो के दिलों में हमदर्दी चाहते हैं ,
या खुदा !
माफ़ करना उन्हें ,
इल्म नहीं इस बेबाक समय के नशे मैं
उन्हें की वो क्या किये जाते हैं .........
अनुभूति

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