सोमवार, 5 दिसंबर 2011

माँ -पिता के श्री चरणों में

जड़े अपने फलो को दिया करती हैं
अपने ही गुण -अपने ही संस्कार 
मेरी आत्मा आज धन्य हैं !
जो मेरे माँ- पिता आप से पाया हैं
मेने सत्य ,और ईश्वर के होने का संस्कार 
मे दोषी हूँ आप की, जो करती ही रही ,
 शुब्धता हजार 
 मेरी आँखों से बहते 
इन अश्को ने आज जाना हैं 
मुझे क्या मिला हैं अपनी जड़ो से
 हां मेने पायी हैं अपने राम की ,
अपने सत्य की ,
स्नेह कृपा सौ बार 
धन्य हूँ मेरे पिता ,
जो मिला हैं मुझे अपनी हर श्वास में 
अपने रोम -रोम में 
आप का ये ज्ञान .
सत्य की शक्ति 
और आप दोनों के चरणों का स्नेह अपार
आज मे संसार की सबसे
बड़ी धनी बन गयी हूँ
जो जाना हैं मेने 
अपनी जड़ो का ये गुण
मुझे हर जनम में
अपनी ही बिटिया कीजो 
हे ईश्वर !
मुझे हर जनम 
ये वर जरुर दीजो 
अनुभूति का चरण वंदन अपने माँ -पिता के श्री चरणों में





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