शुक्रवार, 11 नवंबर 2011

इन्तजार

तेरे इन्तजार मे ये शब क्या ये जिंदगी यूँ ही कट जायेगी ,
मे मरती ही रहूंगी और तेरे सामने मेरी तक़दीर हँसती जायेगी .......
तुम खुदा हो ,फरिश्ते हो जो भी हो
पर तुम्हारे बिन ये जिंदगी न जी जायेगी
मरना हैं रोज ,हर आह ,
हर अहसास ,तन से हो या आत्मा से
एक दिन तो मिटना ही हैं
फिर मे क्यों न मिट जाऊं तबाही के रास्तो पे ..........
जो न हो सकी मे तेरी तो अपनी होके कहा जी पाऊँगी
जानती हूँ जिस रस्ते पे बड़ी हूँ वो क्या कहा जाता हैं
नहीं मालुम मुझे पर इतना पता हैं वफ़ा का इनाम क्या दिया जाता हैं .........
आप से बेहतर किसी ने मुझे इनाम नहीं बख्शा ,,,,,,,,,,,,,,,

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अनु

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