शनिवार, 2 जुलाई 2011

सारे संसार से अलग हैं मेरा सजना



मेरी वफाओं की खुशबु घटी नही,
और सयम के सांचे और
विश्वास की आग में पकती और
महकती ही जा रही हैं
और में मदहोश हूँ
हां में मदहोश हूँ !
तेरे नाम से
ओ मेरे प्रियतम !
सारे संसार से अलग हैं मेरा सजना
मेरा कोस्तुभ धारी !
हां मेरा मुरलीधर !
मेरा कृष्णा !
मेरा कान्हा !
हर रोज झाके रूप सुहाना दिखाकर मुझे
भागवत के पन्नो से ,
कहे कान्हा !
काहे तू रोये !काहे तू मिटे इतना !
ज़रा देख पलट में तो कब से संग साथ खड़ा इतना
समय हैं अभी ये साधना का
सयम का
एक दिन जरुर आउंगा
तुने जो पुकारा मुझे अपनी आत्मा से
हां थाम ले ज़रा अभी मुझे भी थम जाने दे
हां रुक जरा वो फूलो से महकी फिजा
तो आने दे |
होगा तेरा मेरा अद्भुत मिलन
ये अक्ष्णु विशवास रख
इस साधना और विशवास की
परीक्षा अभी हो जाने दे |
अनुभूति |

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