गुरुवार, 19 मई 2011

पथरीले पथ ,

ओ कृष्ण कन्हाई!
मुरली वाले !
 नींद नहीं आखो में अब ,
निस दिन मांगे ,
ये जीवन आप से नवीन पथ ,
चेन कँहा से लाऊ,
जब बंद करू आँखे
देखे मन नदियाँ ,
पहाड़ , पथरीले पथ ,
स्वप्नों में भी क्यों सुकून हैं इन पथरीली राहो में 
ये कोनसा मार्ग हैं जीवन का ये सुलझा दे |
ये मेरी मुक्ति का मार्ग हैं या कोई भ्रम 
जो भी हैं प्रभु अब मेरा मार्ग सुलझा दे !+
दे आशीष मुझे इन कष्टों से 
  मुक्ति दिला दे |

"अनुभूति "

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