रविवार, 1 मई 2011

जीवन पथ

बड़ी कठिन हैं इस जीवन पथ पे आराधना तुम्हारी 
कुछ पल सपने , कुछ पग काटे ,कुछ पग  फुल 

हर पल नया पाठ -नयी सिख दे मुझको 
बतलाएं  अंतिम सत्य मेरा
हर बार कहे राम मुझे पग -पग थाम 
बिन सोचे चली आ मेरे चरण धाम

भ्रम टूटे मन के एक पीड़ा मन में उठ जाए 
एक बार कहू कुछ नहीं बस अब मर जाए 

मेरे प्रभु ,
पर हर बार सामने खड़े साक्षात मुझे कहो क्यों ?
पगली साथ खड़ा हूँ में तेरे  तेरा राम |

क्यों विचलित हैं क्यों परेशान ?
विशवास रख नियति ने लिखा हैं तुझसे कोई बड़ा काम |

वो कर्ज अभी जीवन का चुकाना हैं फिर आना मेरे धाम |
मेरे राम , मेरे राम
बड़ा आलौकिक अहसास हैं पास कुछ नहीं फिर भी जीवन का एहसास हैं |
ह्रदय के तीक्ष्ण दर्द के साथ , सब कुछ साफ़ हैं |

":अनुभूति "


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