गुरुवार, 28 अप्रैल 2011

सुनहरी परी

यादों के आकाश  से,
एक सुनहरी परी उतर आई हैं ,
और छु गयी हैं मेरे  उड़ते आंचल को ,
छु गयी हैं मेरे अंतस को , 

मेरे कानों  के चारों और गूंज रही हैं 
एक मीठी सी मुस्कराहट 
उसने अपनी जादू की छड़ी से ,
मेरे उदास चेहरे पे छेड़ दी हैं,
बड़ी सी मुस्कराहट 
और में खिलखिला उठी हूँ |

जीवन की इस उहापोह में 
भूल गयी थी अपने ही अंतस को
की सुनहरी परी तुमने मुझे कर दिया जिवंत
और एक बार फिर भर  दिया खाली पडा सपनों  का जाम 

हां ,सुनहरी परी ,जीवन भर,
तुम यूँही मेरे साथ रह कर,
भरती रहना खाली पडा ये सपनो का जाम|

क्योकि सपने पुरे हो न हो 
सपनों का जाम  भरने का हक़ 
ईश्वर ने सबके नाम लिखा हैं |

हां ,सुनहरी परी ,
आती ही रहना ,
औरभरती ही रहना ये 
सपनों का जाम |
"तुम्हारी अनुभूति "

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