गुरुवार, 31 मार्च 2011

प्रभु मेरे


प्रभु मेरे ,
कैसा एहसास है ,
की इन खामोशियों में भी ,
आप साथ हो मेरे ,
न भूख ,
न प्यास हैं,
मेरे मन को ,

क्यों हमेशा आप का ही विशवास 
जीवन का कोन सा नया मोड हैं ,
अन्तर्यामी तू ही बता दे ,
मुक्ति का ये कोनसा मार्ग हैं,
मेरी अराधना का कोनसा विशवास हैं ,

प्रभु !

4 टिप्‍पणियां:

कुश्वंश ने कहा…

जब कोई सहारा साथ न दे तो प्रभु आपके साथ होते है विस्वास रखिये , अच्छी रचना

Manpreet Kaur ने कहा…

बहुत ही अच्छा पोस्ट है जी ! हवे अ गुड डे ! मेरे ब्लॉग पर जरुर आना !
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रश्मि प्रभा... ने कहा…

मुक्ति का ये कोनसा मार्ग हैं,
मेरी अराधना का कोनसा विशवास हैं ,wahi vishwaas jahan prabhu aatma me vilin ho sare adhaar de deta hai

संजय भास्कर ने कहा…

ह्र्दय की गहराई से निकली अनुभूति रूपी सशक्त रचना