गुरुवार, 24 फ़रवरी 2011

इन्तजार

इन्तजार !! 

सोलह बरस की उमर से ,
पच्चीसवें बसंत का इन्तजार ,
ना जाने किन -किन हसरतो,
को मन के किसी कोने में छुपाए रखता हैं |

भीगी मेहंदी से रची 
हथेलियों की खुशबू का इन्तजार ,

या मन ही मन 
उनसे मिलने का इन्तजार |

हां , 
 जीवन का हर पल 
किसी न किसी ख़ुशी का इन्तजार ही तो है  |


-- अनुभूति 

6 टिप्‍पणियां:

GirishMukul ने कहा…

इन्तज़ार
की मिठास
वाह अनूठा एहसास

नीरज जाट जी ने कहा…

बहुत खूब।

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!
इन्तजार के पल सुनहरे होते हैं!

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत सुन्दर अभिव्यक्ति!

नीरज गोस्वामी ने कहा…

सही कहा जीवन भर हम ख़ुशी का इंतज़ार ही करते हैं...

नीरज

दिगम्बर नासवा ने कहा…

शायद जीवन इसी का नाम है ... इंतज़ार .... और इसमें जो मज़ा है वो किसी में नहीं ....