शनिवार, 24 जुलाई 2010

तुम्हारे वादे ,

तुम्हारे वादे , 

एक आस जिन्दगी की ,और
तुम्हारे वादे ,

जिन्दगी का फलसफा यही है,
तुम्हारे वादे .

तुम्हारे स्वप्न सुकून देते हैं
 और , तुम्हारा साथ वेदना .

एक डर , 
हाँ एक डर 
मुझे हर पल सताता हैं ,
कि कही तुम, मुझसे बिछड़ ना जाओ |

तुम्हारे इन वादों पे यकीन करना,
तो जिन्दगी चाहती हैं .

पर हर आने वाले पल की आहट
फिर भी मुझे डराती हैं |

तुम्हारी साँसे मुझे 
हर पल विश्वास दिलाती हैं, 
फिर भी हमनशीं  मेरे ,
ये दुनिया मुझे पल -पल डरती हैं|

क्या सत्य हैं ? 
तुम्हारी सांसे या 
तुम्हारे वादे ?

इसी  ख़ुशी और गम 
में  जिन्दगी बिताती हूँ |

हाँ 
फिर भी एक आस जिन्दगी की और तुम्हारे वादे !


-- अनुभूति