सोमवार, 29 मार्च 2010

एक ख्याल ही बन कर रहगए, तुम
मेरे सपनो के सोदागर 
आज भी तेरता है एक सपना मेरी आँखों मै 
तुम नहीं मिले मुझको ,इसलिए मेरे आँखों की नमी ने ज़िंदा रखा है उस सपनो से सोदागर को 
मेरी तेरती आँखों मै 
कहाँ हो तुम ?
आज भी इन्तजार है मेरी रूह मै बसने वाली सोलह साल की  दीवानी को तुम्हारा 
की तुम हर उसके हर अहसास को पद लोगे ,
समझ लोगे उसकी हर मुश्किल को 
तुम नहीं खेलोगे उसके अहसासों से ,
 क्योकि मेरे सपनो के सोदागर तुम तो पुरे इंसान होंगे ,
कब आओगे तुम? 
और मुझको मुक्त करोगे जीवन की इन विडम्बनाओ से 
अब तो आँखों की नमी भी कम होने लगी है 
और उसकी जगह आंसुओ ने ले ली हैं 
अब तो तुम बूंद बूंद बन कर इन आंखो से बहे जा रहे हो !
अब तो चले आओ 
कही ऐसा ना हो की ये नमी भी सुख जाए
सुखी सरिता की तरह
चले आओ अब तो मेरे सपनो के सोदागर 
   चले आओ |











          
तुम और तुम्हारी आहटे,
 मन के सारे दरवाजे खोल देती है 
और 
 जी उठती हूँ मै एक बार फिर ,
खिलखिलाकर मुस्कुरा देता है जीवन 
तुम्हारी आहटोको करीब पाकर .
मिलो के फासलों पे भी तुम्हारी खुशबू
मुझको विचलित कर देती है 
अच्छा ,बुरा साथ और दुरी इन सब से दूर आ चुकी हूँ मै ,
तुम्हारे साथ चलते चलते इस अनजान डगर पे
और 
अब कोई डर नहीं मुझको ,
क्योकि अब साथ हो तुम मेरे
याने खुद खुदा चला आया है मुझको थामने 
और 
मै बे खोफ बड़ चली हूँ तुम्हारी आहटो के करीब 
क्योकि मै जानती हूँ 
मेरे मन के मानस तुम ही दोगे मुझको अस्तित्व 
तुम्हारी पत्नी .प्रेमिका ,या मीरा का स्नेह नहीं मेरे मन मै 
मै तो एक खुली और साफ़ हवा के झोके की तरह 
तुम्हे अपनी  मुस्कुराहट  

देना चाहती हूँ ,सदा की तरह ही |